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छोटे भाई से चूची मिसवाई मदहोशी में

स्मिता नाम की एक लड़की थी, जिसकी उम्र 22 साल थी। उसके घर में माता-पिता थे, उससे छोटी बहन अंकिता, जो 21 साल की थी, और उसका छोटा भाई अरुण था। अरुण उनकी फैमिली में सबसे छोटा था। उनकी फैमिली एक-दूसरे से बहुत प्यार से रहती थी। कभी किसी से झगड़ा नहीं होता था और सभी के बीच सिर्फ प्यार ही प्यार था। लेकिन एक दिन स्मिता से एक बहुत बड़ा पाप हो गया। उसे खुद को नहीं लगता था कि यह पाप था, लेकिन दुनिया की नजरों में यह पाप ही था। आज वह उस पाप की पूरी कहानी विस्तार से बता रही थी।

स्मिता के स्कूल में उसकी सभी सहेलियाँ बहुत शैतान और बिगड़ी हुई थीं। उस स्कूल का माहौल ही ऐसा था। वहाँ सीनियर्स और जूनियर्स, सबके बॉयफ्रेंड थे। लेकिन स्मिता का अभी तक कोई बॉयफ्रेंड नहीं था। वहाँ दिन भर लोग आपस में सेक्स से जुड़ी बातें करते रहते थे। धीरे-धीरे स्मिता की भी उन सबसे दोस्ती हो गई और वह भी उसी रंग में ढलने लगी।

कुछ दिनों बाद दो लड़कों ने स्मिता को प्रपोज किया, लेकिन उसने मना कर दिया। उसे ऐसा लड़का चाहिए था जो उसकी परवाह करे और उससे सच्चा प्यार करे। उसे लगता था कि अब इस दुनिया में परिवार के अलावा ऐसा कोई नहीं मिल सकता। दूसरों को जोड़ों में देखकर उसे जलन होती थी, क्योंकि वह भी चाहती थी कि उसका कोई ऐसा साथी हो। उसकी कुछ सहेलियाँ सेक्सी किताबें पढ़ती थीं और उनके पास सेक्स फिल्मों का बहुत बड़ा और शानदार कलेक्शन था।

धीरे-धीरे स्मिता भी सेक्स की आदी हो गई थी। सभी जानते हैं कि जिनके पास सेक्स करने के लिए कोई नहीं होता, वही ऐसी फिल्में देखते हैं। बाकी लोग जो सेक्स करते हैं, वे इन फिल्मों पर अपना समय बर्बाद नहीं करते। स्मिता को सेक्सी किताबों और फिल्मों की लत लग गई थी। वह अपनी चूत में उंगली भी करने लगी थी। अब उसे किसी भी तरह असली लंड चाहिए था, लेकिन साथ में सच्चा प्यार भी चाहिए था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। वह अपने पापा और छोटे भाई को अब अलग नजरों से देखने लगी थी। उसे लगा कि वह कुछ ट्राई करे, लेकिन यह सब उसे मुमकिन नहीं लगता था।

स्मिता के पापा और छोटा भाई उससे बहुत अच्छे से पेश आते थे और उसे बहुत प्यार करते थे। उसे लगता था कि पापा के साथ यह सब बहुत मुश्किल और नामुमकिन था। इसलिए उसने सोचा कि क्यों न अपने छोटे भाई अरुण के साथ कुछ ट्राई किया जाए। उसके मन में बहुत घबराहट थी, लेकिन सेक्स की तड़प उससे कहीं ज्यादा थी। उसके दिमाग में अब सिर्फ सेक्स ही सेक्स था, और कुछ नहीं।

रात को स्मिता, अंकिता और अरुण तीनों साथ सोते थे। अरुण सबसे छोटा था, इसलिए स्मिता को लगता था कि उसके साथ यह सब करना आसान होगा। उसने बहुत दिनों से अरुण का लंड नहीं देखा था। बचपन में तो उसने कई बार देखा था, लेकिन अब वह उसे अपनी चूत के अंदर चाहिए था। उसे नहीं पता था कि इस उम्र में उसका लंड खड़ा होता होगा या नहीं। वैसे आजकल लोग इस उम्र में मुठ मारना शुरू कर देते हैं, जैसा उसने एक कहानी में पढ़ा था। फिर एक रात को…

स्मिता ने अरुण से कहा, “अरुण, तुझे गणित में कुछ पूछना था न? तू आज मुझसे गणित की जो भी समस्या है, वो सब पूछ लेना। क्योंकि तीन दिन बाद तेरा एग्जाम है।”
अरुण ने जवाब दिया, “लेकिन दीदी, मुझे तो नींद आ रही है।”
स्मिता बोली, “नहीं अरुण, आज रात को दो चैप्टर खत्म करने पड़ेंगे।”
अरुण ने कहा, “ठीक है दीदी।”

स्मिता ने उसे बहुत देर रात तक पढ़ाया। अरुण पढ़ते-पढ़ते उसके बेड पर ही सो गया। उस समय बहुत गर्मी थी। अरुण ने बनियान और बरमूडा पहना हुआ था, और स्मिता ने टी-शर्ट और कैप्री। जब सबको नींद आ गई, तो स्मिता ने अरुण के लंड को देखकर अपनी चूत में उंगली करना शुरू कर दिया।

कुछ देर बाद स्मिता एक बार झड़ गई, लेकिन उसे अरुण के साथ कुछ करना था। उसे बहुत डर भी लग रहा था कि कहीं कुछ गलत हो गया तो क्या होगा। अगर अरुण ने माँ-पापा को बता दिया तो क्या होगा? फिर भी, वह हर रोज रात को अरुण के साथ देर तक पढ़ाई करती और वह उसके बेड पर ही सो जाता। स्मिता उसके लंड को देखकर अपनी चूत में उंगली करती थी।

एक रात स्मिता ने थोड़ी हिम्मत जुटाई। उसने अरुण का एक हाथ पकड़ा और धीरे से उसे अपनी पेंटी के अंदर डाल दिया। फिर वह सोने का नाटक करने लगी। कुछ ही देर बाद उसने अरुण को जोर-जोर से हिलाना शुरू किया और उसे डाँटकर फटकारते हुए उठाया। स्मिता ने कहा, “अरुण, तेरा हाथ मेरी पेंटी में क्या कर रहा था? तुझे जरा सी भी शर्म नहीं आती? मैं तेरी बड़ी बहन हूँ और तू मेरे साथ यह सब कर रहा था!” अरुण उस समय गहरी नींद में था। वह बहुत डरकर धीरे से उठा और उसने अपना हाथ जल्दी से पेंटी से बाहर निकाल लिया। 

अरुण ने कहा, “दीदी, यह मैंने नहीं डाला। मुझे माफ कर दो दीदी, अब ऐसा कभी नहीं होगा। मुझे नहीं पता यह कैसे हुआ। प्लीज आप किसी को मत बताना। माफ कर दो।”
स्मिता बोली, “अरुण, तू बहुत बिगड़ गया है। मैं सुबह होते ही माँ-पापा को सब बता दूँगी कि तू मेरे साथ क्या कर रहा था।”

अरुण यह सुनकर जोर-जोर से रोने लगा। स्मिता को उस पर दया आ गई। उसने अरुण को अपने गले से लगाकर चुप करवाया और कहा, “ठीक है, चल अब चुप हो। मैं किसी को नहीं बताऊँगी।” अरुण ने उसकी बात सुनकर एकदम चुप हो गया। फिर उसने कहा, “अब मैं आपके बेड पर कभी भी नहीं सोऊँगा।” स्मिता ने जवाब दिया, “तुझे यहीं सोना पड़ेगा, क्योंकि अगर तू नहीं सोया तो मैं माँ-पापा को सब कुछ बता दूँगी।” अगले दिन स्मिता ने उससे पूरे दिन पूछताछ की।

स्मिता ने पूछा, “अरुण, तू इतना बिगड़ कैसे गया? तुझे कौन बिगाड़ रहा है और तुझे यह सब कौन सिखाता है?”
अरुण ने जवाब दिया, “दीदी, मेरे दो-तीन फ्रेंड्स हैं। वो सब बहुत गंदी-गंदी बातें करते हैं। शायद उनके कारण मुझसे ऐसा हो गया। सॉरी दीदी।”
स्मिता बोली, “कोई बात नहीं।”
अरुण ने कहा, “लेकिन प्लीज आप किसी को मत बताना।”
स्मिता ने जवाब दिया, “ठीक है, लेकिन मेरी एक शर्त है कि तू मुझे वो सब बताएगा जो तेरे फ्रेंड्स तुझे बताते हैं।”
अरुण बोला, “दीदी, वो सब बहुत गंदी-गंदी बातें करते हैं। मुझे आपको बताने में भी शर्म आ रही है।”
स्मिता ने कहा, “तू नहीं बताएगा तो फिर तू जानता है कि मैं क्या कर सकती हूँ।”
अरुण ने हामी भरी, “ठीक है दीदी, मैं कल से आपको सब बातें बताऊँगा।”

धीरे-धीरे समय गुजरता गया। स्मिता और अरुण एक-दूसरे से बहुत खुल गए। अब अरुण स्मिता की हर बात मानने लगा था। स्मिता रात को उस पर पैर रखकर सोने लगी और अपने बड़े-बड़े बूब्स को उसके शरीर से छूने लगी। वह जानबूझकर कभी-कभी पेंटी और ब्रा भी नहीं पहनती थी। एक रात जब स्मिता अपनी चूत में उंगली कर रही थी, तभी अरुण जाग गया। स्मिता की आँखें बंद थीं। अरुण उसे देखकर बोला, “दीदी, यह क्या कर रही हो?”

स्मिता ने कहा, “अरुण, मुझे बहुत डर लग रहा है। प्लीज तू मुझे एक बार हग कर।” उस समय वह उंगली करते-करते झड़ने वाली थी, इसलिए उसकी स्पीड अपने आप बढ़ चुकी थी।
अरुण बोला, “क्या हुआ? ठीक है, मैं करता हूँ।”

स्मिता ने भी उसे हग किया। वह भूल गई थी कि उसने पेंटी नहीं पहनी थी। वह अरुण पर ही झड़ गई और उसे मदहोशी में अपने दोनों पैरों के बीच दबा लिया। उसकी चूत का सारा पानी अरुण की अंडरवियर पर निकल गया।
अरुण ने कहा, “दीदी, आप पागल हो क्या? आपने यह क्या किया?”
स्मिता बोली, “चुपचाप रह। सब सो रहे हैं। थोड़ा धीरे बोल, वरना कोई उठ जाएगा।”
अरुण ने कहा, “दीदी, लेकिन यह सब गलत है।”
स्मिता ने जवाब दिया, “क्यों? तूने जो उस दिन किया था, क्या वो सही था?”
अरुण बोला, “दीदी, मैं उस दिन नींद में था, लेकिन आप तो जाग रही थीं।”
स्मिता ने पूछा, “क्या तुझे मेरे बूब्स देखने हैं?”
अरुण ने कहा, “दीदी, आप पागल हो क्या? आप मेरी बहन हो।”
स्मिता बोली, “लगता है तेरी शिकायत माँ-पापा से करनी पड़ेगी।”
अरुण ने शिकायत की, “यार दीदी, आप तो मुझे बहुत ब्लैकमेल कर रही हो।”

स्मिता उसके पास आई और उसने अरुण के हाथ अपने बूब्स पर लगवा दिए। अरुण को पहले बहुत अजीब लगा, लेकिन फिर उसने कहा, “दीदी, अंधेरा बहुत है। मुझे यह देखना है कि यह कैसे होते हैं, क्योंकि मैंने कभी नहीं देखे।” स्मिता ने जवाब दिया, “तू चिंता मत कर, मैं तुझे सुबह दिखा दूँगी। अभी तू इन्हें जोर से दबा।” अरुण ने वैसा ही किया। स्मिता को बहुत मजा आ रहा था।

अरुण स्मिता के बूब्स को जोर-जोर से दबा रहा था। स्मिता अपनी चूत में उंगली करके झड़ गई। उस दिन स्मिता ने और कुछ नहीं किया। अगले दिन अरुण स्मिता के पास आया और बोला, “दीदी, प्लीज मुझे आपके बूब्स दिखा दो।” स्मिता ने कहा, “तू थोड़ा इंतजार कर। जिस दिन हम दोनों घर पर अकेले होंगे, तब मैं तुझे सब कुछ दिखा दूँगी।”

रात को अरुण ने खुद स्मिता की टी-शर्ट में हाथ डालकर उसके बूब्स को एक-एक करके जोश में आकर दबाने और मसलने लगा। स्मिता ने उससे पूछा, “क्या तू इन्हें टेस्ट करेगा?” अरुण ने साफ मना कर दिया। फिर स्मिता ने अपनी टी-शर्ट उतार दी और खुद ही उसे बारी-बारी से अपने बूब्स चूसाने शुरू कर दिए। अरुण बहुत अच्छी तरह से चूस रहा था। स्मिता को लग रहा था कि उसे बूब्स चूसना बहुत अच्छे से आता है। अब अरुण को भी बड़ा मजा आने लगा था।

स्मिता ने सोचा कि आज बहुत अच्छा मौका है। उसने अरुण से कहा, “अरुण, तू अपनी पैंट उतार दे।” अरुण ने मना किया, तो स्मिता ने जबरदस्ती उसकी पैंट उतार दी। उसकी अंडरवियर के ऊपर से ही स्मिता ने उसके लंड को हाथ लगाकर महसूस किया। अरुण का 4 इंच का लंड खड़ा हुआ था। उसे स्मिता से बहुत शर्म आ रही थी, लेकिन जोश भी चढ़ चुका था। फिर स्मिता ने सही मौका देखकर उसकी अंडरवियर भी उतार दी। वह भी पूरी नंगी हो गई। दोनों एक ही चादर के अंदर घुस गए। अरुण बहुत सोच रहा था कि अब वह क्या करे।

स्मिता ने अरुण के लंड को अपने एक हाथ से छुआ और महसूस किया। दोस्तों, वह क्या अहसास था! स्मिता को बड़ा मजा आ रहा था। धीरे-धीरे अरुण को भी मजा आने लगा था। स्मिता ने अब उसके लंड को जोर-जोर से हिलाना शुरू किया। लेकिन उसने सिर्फ 3-4 मिनट तक हिलाया और अरुण उसके हाथ पर ही झड़ गया। उसे शर्मिंदगी महसूस हुई।

स्मिता ने अरुण का सारा वीर्य अपने हाथ से और उसके लंड से चाट लिया और उसे बहुत अच्छे से साफ कर दिया। अरुण ने कहा, “छी दीदी, यह तो मेरे लंड से निकला है।” स्मिता उसकी इस प्यारी बात से बहुत खुश हुई और उसने अरुण को चूम लिया। वह इतनी खुश थी कि बयान नहीं कर सकती थी।

स्मिता ने अपनी पूरी जीभ अरुण के मुँह में घुसा दी और उसकी जीभ को जमकर चूसा। इस जोश भरी चुम्मी के कारण अरुण का लंड फिर से तनकर खड़ा हो गया और स्मिता की चूत को सलामी देने लगा। लेकिन इस बार स्मिता ने कहा, “मैंने तेरा वीर्य चाटा है, अब तू अपनी जीभ से मेरी चूत चाटेगा।” अरुण ने साफ मना कर दिया।

स्मिता ने अरुण के मुँह को जबरदस्ती अपनी जाँघों से दबाकर उसका मुँह अपनी चूत पर धक्के मारने लगी। अरुण ने भी उसकी चूत में अपनी पूरी जीभ डालकर अंदर-बाहर करके चूसना शुरू कर दिया। स्मिता इतने ज्यादा जोश में थी कि बहुत जल्दी ही अरुण के मुँह में झड़ गई। अरुण ने उसका सारा रस चूस लिया और कहा, “दीदी, आपके पानी का स्वाद बहुत अच्छा लगा, लेकिन थोड़ा-थोड़ा नमकीन सा लगा।” स्मिता ने जवाब दिया, “रुक, मैं तुझे अभी और पिलाती हूँ।”

स्मिता को भी प्यास लगी थी। उसने अरुण का लंड अपने मुँह में लिया और चूसना शुरू किया। दोनों 69 पोजीशन में लेट गए। स्मिता ने उसका मुँह अपनी चूत से लगाकर जोर से दबा लिया। उसे 69 पोजीशन में बहुत मजा आया। कुछ देर बाद दोनों एक-दूसरे के मुँह में झड़ गए। फिर उन्होंने एक बहुत लंबा चुम्मा लिया और कपड़े पहनकर सो गए।

स्मिता रात को अरुण की अंडरवियर में एक हाथ डालकर सोई थी। वह रात भर उसकी गांड की मालिश करती रही और उसके लंड की गर्माहट लेती रही। लेकिन अरुण थककर गहरी नींद में सो गया था। अगले दिन, जब पापा ऑफिस चले गए और मम्मी किसी काम से बाजार गईं, अंकिता स्कूल चली गई। स्मिता ने अरुण को रोक लिया। अरुण मान गया और समझ गया कि स्मिता ने उसे क्यों रोका है।

स्मिता ने कहा, “अरुण, आज घर पर कोई नहीं है। हम दोनों अकेले हैं। आज तुझे जो करना है, वो कर। मैं मना नहीं करूँगी।”
अरुण स्मिता के पास आया और उसके बूब्स को कपड़ों के ऊपर से ही अपने दोनों हाथों से महसूस करने लगा। फिर उसने स्मिता की टी-शर्ट उतार दी। स्मिता ने टी-शर्ट के अंदर कुछ नहीं पहना था। जैसे ही टी-शर्ट खुली, उसके दोनों बूब्स अरुण की नजरों के सामने थे। अरुण ने उन्हें छूते ही उसका लंड खड़ा हो गया।

अरुण स्मिता के बूब्स को बहुत देर तक घूरकर देखता रहा। वह बहुत खुश था। फिर उसने अपने मुँह को आगे बढ़ाकर बूब्स को किसी छोटे बच्चे की तरह चूसना शुरू कर दिया। स्मिता ने कहा, “तू मेरे सामने पूरा नंगा हो जा।” अरुण को शर्म आ रही थी। स्मिता ने कहा, “जल्दी हो जा, नहीं तो कोई आ जाएगा।”

अरुण जल्दी से पूरा नंगा हो गया, लेकिन उसने अपने दोनों हाथों से अपना लंड छुपा लिया था। फिर स्मिता ने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए। अरुण उसकी चूत को एकटक नजर से देखने लगा। उसके खड़े लंड को देखकर स्मिता से रहा नहीं गया। उसने थोड़ा नीचे झुककर अरुण का तना हुआ लंड पूरा मुँह में लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसा। लेकिन अरुण दो-तीन मिनट में ही झड़ गया।

स्मिता ने भी अरुण से अपनी चूत चटवाई। अरुण ने चूत चाटते हुए कहा, “कल तो आपकी चूत पर बहुत सारे बाल थे, लेकिन आज वो सब कहाँ गए?” स्मिता ने जवाब दिया, “आज मेरे भाई को दिखाने के लिए मैंने वो सब साफ कर दिए।” अरुण ने बहुत अच्छे से स्मिता की कामुक चूत को चाटा। फिर स्मिता ने उसे अपनी चूत का छेद दिखाया और कहा, “अब तेरा लंड इसमें जाएगा।” अरुण को कुछ समझ नहीं आया। स्मिता ने कहा, “तू थोड़ा रुक जा, अभी सब समझ में आ जाएगा।”

स्मिता ने अपने बदन को अरुण के बदन से सटाकर उसे चूमना शुरू किया। अरुण भी जोश में था। वह बहुत ज्यादा गर्म था। उसका लंड फिर से खड़ा हो गया। स्मिता ने अरुण को बेड पर लिटा दिया और उसके पूरे शरीर को चूमते हुए उसके लंड को चूमा। अरुण के लंड से थोड़ा वीर्य निकल रहा था। स्मिता ने उसे चाटा। उसका स्वाद बड़ा नमकीन सा था। फिर स्मिता ने उसके लंड पर अपनी चूत का छेद रखा और एकदम सीधी लेट गई।
उसे और अरुण, दोनों को थोड़ा-थोड़ा दर्द हुआ। अरुण का लंड बार-बार फिसल रहा था। स्मिता ने कहा, “तू भी अब नीचे से धक्का मारना।” अरुण ने वैसा ही किया। फिर स्मिता की चूत में उसका लंड घुस गया। अरुण ने कहा, “दीदी, आपकी चूत अंदर से बहुत गर्म है।” उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। स्मिता ने जोश में बहुत जोर-जोर से अपनी चूत को धक्के मारे। अरुण ने भी अपनी तरफ से धक्के मारे। कुछ देर बाद दोनों एक-एक करके झड़ गए। अरुण को बहुत मजा आ रहा था।

यह उनका पहला सेक्स था। स्मिता के बिना यह सब कैसे होता? लेकिन अब अरुण उसके कंट्रोल से बाहर था। अब स्मिता रोज सुबह उसे अपने बूब्स चूसने देती थी। अरुण भी सेक्स के बारे में बहुत कुछ सीख चुका था। स्मिता उसकी दीवानी हो चुकी थी। उसे अरुण बहुत अच्छा लगता था। वह उसकी बहुत परवाह करती थी। अरुण रोज रात को स्मिता के बूब्स चूसते-चूसते सो जाता था। उसे स्मिता की चूत का पानी पिए बिना नींद नहीं आती थी। स्मिता को भी अरुण का वीर्य पीने की आदत लग चुकी थी।

हम चार दोस्तों ने चोदी एक लड़की की चुत। Desi Ladki Ki Xxx Chut Chudai

Desi Ladki Ki Xxx Chut Chudai पढ़े। हम तीन दोस्तों ने एक देसी लड़की की चूत मारी। हम चार दोस्त हैं, लेकिन एक को गांड मरवाना अच्छा लगता है। हम एक दूसरे की गांड मारते थे जब तक चूत नहीं मिलती थी।

पढ़ी थी।
हमारे चार दोस्तों को एक ही कक्षा में पढ़ाया गया था। एक साथ खेलते, नहाते और खाते थे।
रात को एक कमरे में पढ़ाई करते हुए सो जाते थे।
हम चारों एक दूसरे से अच्छे दोस्त थे।
एक दूसरे के मित्र और सहयोगी थे।
हॉट शॉट माल, लेकिन चारों पढ़ाई में अच्छे हैं।

हम मध्य स्कूल से ही बिगड़ गए थे, जब हम चुदाई की बात करने लगे और गाय, बैल, कुत्ते और कुतिया की चुदाई को बहुत मजा लेकर देखने लगे।
तालाब के घाट को देखने के लिए चारों ओर नहाने जाते थे. सामने के घाट पर नहाती महिलाओं पर हमारी देर तक नजरें टिकी रहतीं।

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कुछ ग्रामीण महिलाएं साड़ी पहनकर नहाती थीं।
गीली साड़ी, यानी सब पारदर्शी, उनके बदन पर चिपकी होती।
उनके दूध, जांघ और चूत सब दिखाई देते थे। हम चारों ओर देखते रहे।

नहाने के बाद वे साड़ी के एक हिस्से को निकालकर साड़ी को पलट कर पहनतीं, फिर साड़ी के गीले हिस्से को निकालकर कंधे पर डालतीं।
सामने वाले को साड़ी को पलटते समय उनका पूरा नंगा बदन दिखता।
शायद उन्हें ऐसा नहीं लगता था।

स्त्रीघाट के सामने वाले घाट में हम नहाते रहते थे, स्त्रियों की नंगी देह को देखने के लिए।

हम नहाने से पहले ये सीन देखने के लिए कुछ देर सामने खड़े रहते।
जब उनकी जांघ, दूध या कभी-कभी गांड दिखाई देती, तो हमारा लंड खड़ा हो जाता और हमें ये सब देखकर बहुत अच्छा लगता था।
हम अपने हाथों से अपने लौड़े सहलाने में मज़ा लेते।

हमने उन स्त्रियों में से किसकी रिश्तेदारों पर ध्यान नहीं दिया।
उस समय मुझे लगता था कि जो भी सामने आए, हमें बस उसकी नंगी देह देखना चाहिए।

मेरा दोस्त अनिल, यानी अनु, मेरे चारों दोस्तों में से सबसे अधिक प्यार करता है।
मैं अभी भी उसे बहुत प्यार करता हूँ। वह मेरा विरोधी भी है।

लेकिन वह बहुत हॉट है, वह झिझकता है। वह कभी किसी से सेक्स की बात नहीं करता, लेकिन अगर कोई ऐसा करता है तो वह बहुत खुश होकर चुदाई की बात करता है।

हम गांडू गांडू (देसी लड़की की चूत मारी) खेलते थे।

हम चारों दोस्त गे सेक्स या गांड मरवाने के खेल में दो कपल बन गए।
रात में पढ़ाई करने के बाद वे दरवाजे की सिटकिनी बंद करके सो गए।
फिर दोनों प्रेमी एक दूसरे से प्यार करने लगे।

जब हम एक जोड़ी बन गए, मेरे दो दोस्तों ने आपस में बदलकर मेल और फीमेल लिंक बनाए।
मैं और मेरा दोस्त अनिल दूसरे जोड़े में थे।
वह मुझे ज्यादा अच्छा लगता था, इसलिए मैं उसे अनु कहता था।

अनु मेरी अभिसारिका होता।
वह स्त्री होती और मैं मर्द होता।
अनु को हर बार मैं ही चोदता था।
उसने कभी मुझे नहीं चोदा। साला बहुत घबरा गया था, और इसी कारण वह कभी कोशिश नहीं करता था।

रात को पढ़ाई के बाद मैं अनु से चिपक जाता था, उसकी गांड के छेद के सामने मेरा लंड तना हुआ था और एक पैर उसकी कमर पर रखता था।

मैं उसकी हथेली को अपने आंडों पर रखकर उसके लंड और आंड को कपड़े के ऊपर से सहलाने लगा।

अनु मेरे आंडों को बहुत प्यार से सहलाता है।
हमारे आंड कड़क होते।

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तब हम एक दूसरे के लंड को सहलाते, लुंगी खोलकर अंडरवियर भी उतार देते और टन टन करने लगते।

एक दूसरे के लौड़े को कुछ देर तक हिलाते हुए, फिर पीछे करके लंड की मुठ मारते हैं।
लंड सहलाना बहुत मजा आता था।

फिर लंड से पानी निकलने पर हाथ धोकर सो जाते।

हम लोग इसे हर दिन पकड़ते और हिलाते थे।
हिलाते हुए सर्र से वीर्य निकलते समय हमारे अंगों में जो खिंचाव और दर्द होता, वह एक अद्भुत अनुभूति देता।

जब उनकी आंखें बंद हो गईं, बस ऐसा लगता था कि वे जन्नत में आ गए।

जिस दिन मुझे गांड मारने का मन होता, मैं अनु को खिसकाकर एक करवट में लिटा देता।

हर शाम हमारा एक दोस्त एक कटोरी में तेल लाता था।

वह तेल हमारे लिए बहुत उपयोगी था जिस दिन हमें गांड में लंड देने का मन होता था।

मैं गांड मारने वाले दिन अपने लंड पर तेल लगाकर मालिश करता था।
फिर उंगली के माध्यम से अनु की गांड में तेल लगाकर मक्खन की तरह मुलायम बनाता।
अनु की हामी मिलते ही मैं अपना बड़ा लंड उसकी गांड में डाल देता।

अनु की गांड में अक्सर का लंड डालते समय उसकी गहरी आह निकल गई।
थोड़े धक्कों के बाद उसे मज़ा आने लगा और हम दोनों गांड चुदाई करने लगे।

मैं कमसिन लड़की की तरह उसे चोदता था।
फिर मेरा लंड कुछ देर में उसकी गांड के अन्दर ही अपने रस की पिचकारी छोड़कर ढीला होने लगा।
जब मेरा बीज उसकी गांड में निकल गया, तो उसे बहुत खुशी हुई।

उस समय, मैं भी अनु के लंड को हाथ से हिलाकर मुठ मारने लगा, जिससे उसका लंड भी स्खलित होने लगा।

जब मैं उठकर उससे पूछता कि मेरी जान को क्या हुआ..। आपका रस निकला!
आनन्द की अतिरेकता में मेरा दोस्त बताता था कि हां उसका भी वीर्य निकल गया था।

हम दोनों अंडरवियर पहनकर सो जाते और चोदने वाले का बीज निकल जाता।
चुदाई के बाद हम दोनों थके हुए सो गए।

कभी-कभी दोनों जोड़े दिन में भी यौन संबंध बनाते थे।
रविवार या किसी छुट्टी के दिन, हम सब हमारे एक दोस्त के घर के एक कमरे में मिलते थे, या उसी के घर में हमारे पढ़ने वाले कमरे में, और कमरे के दरवाजे की सिटकिनी को अंदर से बंद करते थे।

हम सब लुंगी अंडरवियर निकाल कर नंगे लेट जाते।
फिर एक दूसरे का लंड पकड़कर हिलाते हैं। उस समय चाहते तो तेल भरकर अपने साथी की गांड में चुदाई करने लगते।

कभी-कभी करवट वाले आसन में तो कभी-कभी साथी को उकड़ू आसन (घोड़े का आसन) में चुदाई करने का मजा लेते हैं।

ये घोड़ा घोड़ी के आसन पर बैठकर चुदाई करने में अधिक मजा आता था। इसमें लंड गांड में अधिक अंदर जाता था।

उस समय, हम सब अक्सर यह मानते थे कि अनु सिर्फ गांड मरवाने के लिए रेडी रहता था और उसका लंड कभी किसी की गांड में नहीं जाता था।

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Apes समलैंगिक संबंध बनाते समय कई अलग-अलग प्रयोग करते थे।
हम कभी कमरे में तो कभी तालाब या नदी में चुदाई करते थे।

हम चारों दोस्तों ने गर्मियों में दोपहर में तालाब में नहाने जाते या कभी-कभी पास की नदी में देर तक नहाते।

पानी के अंदर दोनों कपल चुदाई करते हुए बहुत मज़ा लेते हैं।
एक दूसरे के लंड को पकड़कर उन्हें हिलाते हैं।
देर तक अपने साथी की गांड में लंड डालकर चिपके रहते।

हमारे लंड से वीर्य स्खलित होना बहुत मजा आता था।

इस सबके बावजूद, हम चारों में से कोई भी ऐसा नहीं था कि हम सिर्फ गांड मारने तक सीमित थे।
हम चूत की जुगाड़ में भी रहते थे, इसलिए हम नहाते हुए महिलाओं को चूत की जुगाड़ लगाने का विचार करते रहते थे।

शुरू में, हम सबको चूत की चाहत ने गांड चुदाई का आनंद दिया।
लेकिन चूत चुदाई की इच्छा कम नहीं हुई।

फिर मुझे पहली बार चूत चुदाई करने का अवसर मिला।

एक लड़की हमारे साथ पढ़ती थी।
उसका नाम जीतो था।

वह स्कर्ट टॉप पहनती थी।
उसकी छातियों के उभार पर हमारी दृष्टि थी।

उसके ऊपर से उसके दो बड़े संतरे हमें बहुत आकर्षित करते थे, जो तन कर आम जैसे लगते थे।
उसकी जांघ कभी-कभी दिख जाती, तो हम सभी के लौड़े खड़े हो जाते।

हम सब जीतो में मज़ा लेते।
जीतो ने हाई स्कूल छोड़ दिया था। अब जब हम गांव में उसने देखने जाते थे, तो वह और सुंदर और जवान लगती थी।

उसके बड़े-बड़े चूचे देखकर हमारे लंड कांप गए।
हम चारों दोस्तों ने सोचा कि जीतो को कैसे पटाएं और चोदें।

एक दिन मैंने अपने दोस्त से कहा कि जीतो को चुदवाने के लिए पटाओ, चाहे कुछ भी करो।
हमें मिलकर काम मिला।

वह दिन रविवार था।
उस दिन जीतो प्रायमरी स्कूल के कुआं के पीछे जाएगी। हर रविवार को, हम चारों उसे एक-एक करके कुआं के पास बनी टंकी में चोदेंगे।

अनु इस योजना में तैयार नहीं था।
वह साला डर रहा था और झिझक रहा था।

शेष तीन तैयार थे।

मैंने कहा कि मैं पहले दिन उसे चोदूंगा। उसे हर रविवार को एक-एक करके चोदना।
माने एक रविवार को जीतो की चूत में एक ही लंड घुसेगा।

हम तीन दोस्त अगले रविवार की दोपहर में स्कूल के बाहर इंतजार कर रहे थे।

वह आयी और टंकी के पास बैठ गई।
मैंने उसे टंकी के भीतर फोन किया।

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हम दोनों टंकी में बैठ गए जब वह आई।
उससे दूध खोलने के लिए मैंने जीतो की चूचियों को सहलाया और दबाया।

उसने अपने कपड़े निकालकर अपनी चूचियां खोली।
साली के गोल गोल आम थे..। मैंने उसके दोनों आमों को पकड़ा, दबाया, मसला और अच्छी तरह से मसला।

मुझे बहुत मजा आ रहा था, मेरा लंड खड़ा हो गया था और उसे चोदने के लिए तैयार था।

मैंने जीतो की पैंटी और अपना लंड निकाल दिया।
मेरा लंड खड़ा, तना हुआ और टन टन कर रहा था।

वह प्यार से लंड को देखने लगी।
जीतो को लंड पकड़ने को कहा।
वह लंड को हाथ में लेकर उसे हिलाने लगी।

मैंने उससे अपनी टांग फैलाने को कहा।
वह टांगों को फैलाकर चुदने के लिए तैयार हो गई।
उसकी चूत पर घने, छोटे, काले बाल थे।

मैंने चुदाई की पोजीशन में अपना लौड़ा उसकी चूत में डाल दिया।
उसने आह आह करते हुए अपनी लंड उड़ा दी।

मैं उसकी फ़ुद्दी में लंड डालकर बाहर निकालने लगा।
उसकी कसी हुई चूत में लंड डालने में मुझे बहुत मजा आया।

“फच पच फच…” करते हुए लंड को चोदा जा रहा था।
हाँ, आह आह कर रही थी।

मैंने उसे कुछ देर तक खुशी से चोदा, फिर सर्रर करके अपना वीर्य बहाया।

जीवन में यह पहली बार था जब मैं किसी लड़की को चोदा था..। एक यादगार चुदाई में देसी लड़की की चूत चुदाई!

अगले रविवार को भी ऐसा ही हुआ।
दूसरा मित्र आया।

तीसरे रविवार को जीतो को तीसरे दोस्त ने चोदा।

जीतो की चूचियों और फ़ुद्दी की चमक वास्तव में शानदार थी।

सेक्स कहानी के माध्यम से मैंने आपको बताया कि इस तरह से हम चारों दोस्तों ने अपने बचपन का मजा लिया।

जिया के अकेलेपन का फायदा उठा लिया

मेरा नाम शुभम है और में मेरठ का रहने वाला हूँ. मेरी उम्र 19 साल है और में दिखने में बहुत अच्छा हूँ और गोरे रंग लम्बे छोड़े बदन की वजह से अधिकतर लड़कियाँ मुझे जरुर देखती है. दोस्तों में भी आप लोगों की तरह पिछले कुछ सालों से कहानियाँ पढ़ता आ रहा हूँ और मुझे ऐसा करना बहुत अच्छा लगता है.

फिर एक दिन मैंने अपनी भी एक अच्छी घटना आप लोगों तक पहुँचने के बारे में बहुत सोच विचार किया और फिर मैंने अपनी सच्ची घटना को आप सभी को सुनाने के बारे में विचार किया और अब में उसी घटना को आप लोगों को ज्यादा बोर ना करते हुए पूरी विस्तार से बताता हूँ.

दोस्तों में नोएडा में एक प्राईवेट कम्पनी में नौकरी करने के लिए गया हुआ था और फिर मैंने वहीं पर अपने रहने के लिए किराये से एक रूम ढूंडा और मुझे बहुत मेहनत करने के बाद एक आखिरकार वो रूम मिला जो कि तीसरी मंजिल पर था और ठीक उसके नीचे वाली मंजिल पर 2 बहनें रहती थी.

दोस्तों वो दोनों ही एकदम टॉप की माल थी, उन दोनों के सेक्सी बदन मुझे हमेशा अपनी तरफ आकर्षित करते थे, उनका वो हंस हंसकर बातें करने का तरीका और वो कातिलाना उभरे हुए एकदम गोल गोल बड़े बूब्स और मटकती हुई गांड को देखकर में उनका पूरी तरह से दीवाना हो चुका था.

दोस्तों उनमें से एक का नाम जिया था. में रोज़ उस पर बहुत बार लाईन मारता था और वो भी इस बात को बहुत अच्छी तरह से समझती थी और अब धीरे धीरे हमारी हाय हैल्लो होने लगी और वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगी और में उसे देखकर मन ही मन बहुत खुश होने लगा.

दोस्तों एक दिन की बात है, में अपने रूम में लेटा हुआ अपने लेपटॉप पर एक पॉर्न फिल्म देख रहा था. तभी कुछ देर बाद मुझे अपने दरवाज़ा बजने की आवाज सुनाई देने लगी और में तुरंत उठकर खोलने चला गया और जैसे ही मैंने अपना दरवाजा खोलकर देखा तो मेरे सामने जिया खड़ी हुई थी.

वो एकदम सेक्सी आईटम लग रही थी और में उसे देखकर बहुत खुश था और फिर मैंने उसे अंदर बुलाया और वो मेरे लेपटॉप पर उस फिल्म को देखकर थोड़ा सा शरमा कर मुझसे बोली कि यह क्या है? और वो अब धीरे से मुस्कुराने लगी और में उसके पास जाकर बैठ गया.

तभी वो मुझसे पूछने लगी कि क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है? तो मैंने तुरंत कहा कि अभी तक तो कोई भी नहीं है. फिर वो कहने लगी कि ऐसा क्यों? मैंने कहा कि अब तक मुझे तुम्हारे जैसी सुंदर कोई अप्सरा दिखी ही नहीं, तो में क्या करता?

अब उसने मेरे मुहं से यह बात सुनकर मेरी तरफ मुस्कुरा दिया और फिर बातों ही बातों में कुछ देर बाद वो मुझसे बोली कि मुझे कुछ जरूरी काम है और मुझे अपने घर पर जाना है. फिर मैंने मन ही मन सोचा कि आज तो मेरा काम अधूरा रह गया.

लेकिन मैंने उसका मोबाईल नंबर उससे माँगा तो उसने मुझसे मेरा फोन माँगा और उसने मुझे अपना नंबर मेरे मोबाईल में सेव करके वापस कर दिया और फिर मैंने उसके चले जाने के बाद उसे व्हाटसप पर एक मैसेज किया और फिर हमने रात भर बहुत सारी बातें की.

फिर उसके अगले दिन उसका मेरे पास कॉल आया कि तुम नीचे मेरे रूम में आ जाओ. फिर मैंने तुरंत अपने कमरे को ताला लगा दिया और फिर जल्दी से उसके रूम में पहुँच गया. अंदर जाते ही उसने मुझसे बैठने को कहा और में बैठ गया और अब हम बातें करने लगे.

वो मेरे पास बैठ गई और फिर मैंने उसकी बातों से महसूस किया कि वो थोड़ी सी उदास थी. फिर मैंने उससे पूछा कि तुम्हें क्या हुआ और तुम आज इतनी उदास उदास सी क्यों हो? तब वो मुझसे बोली कि आज उसकी और बहन की किसी बात को लेकर लड़ाई हो गई है और अब वो अपने आप को बहुत अकेला सा महसूस कर रही है और अब वो मेरे पास में लेट गई थी.

में लगातार उसकी बाहर निकली हुई छाती की तरफ देख रहा था, जिसकी वजह से मेरा लंड पूरा तन गया था. फिर कुछ देर बाद मैंने जिया से पूछा कि जिया क्या में तुम्हें हग कर सकता हूँ, अगर तुम्हें बुरा ना लगे तो? दोस्तों उसने मुझसे साफ मना कर दिया, लेकिन वो खुद चाहती थी कि में उसे हग करूं, लेकिन ना जाने क्यों किस बात से डरती थी?

अब मैंने थोड़ी हिम्मत करके उसके मुलायम गोरे गोरे गाल पर अपना एक हाथ रख दिया और उसको अपनी तरफ खींच लिया और उसको बहुत टाईट हग करने लगा. दोस्तों बस फिर क्या था? वो भी यही चाहती थी, वो अब मेरा साथ देने लगी और मैंने भी तुरंत उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए और उसे एक अच्छी सी किस दी और उसने भी मेरा साथ दिया.

फिर मैंने सही मौका देखकर उसके बूब्स पर अपना एक हाथ रख दिया और में बहुत डर रहा था कि कहीं वो मेरी इस हरकत से गुस्सा ना हो जाए, लेकिन वो तो अपनी दोनों आँखे बंद करके लेटी हुई मेरे साथ मज़े ले रही थी और अब मैंने उसके एक एक कपड़े उतारने शुरू कर दिये और वो अब भी अपनी आँखे बंद करके लेटी रही.

अब मैंने उसको उठाकर अपनी बाहों में लेकर उसका टॉप उतार दिया. फिर मैंने देखा कि उसने अपने टॉप के नीचे काले कलर की ब्रा पहनी हुई थी, जो उसकी उस गोरी छाती पर बहुत मस्त लग रही थी. अब मैंने तुरंत उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और उसे फिर से अपनी बाहों का सहारा देकर नीचे लेटा दिया.

अब वो अपनी आँखे खोलकर मुझसे बोली कि तुम बहुत शरारती हो, तुमने मेरे साथ यह क्या किया? तुम बहुत गंदे बेशर्म हो, क्या तुम्हें मुझे ऐसे देखकर मज़ा आता है? फिर मैंने कहा कि हाँ मेरी जान, मुझे ऐसा करना बहुत अच्छा लगता है और अब में वो मज़ा तुम्हें भी देना चाहता हूँ, बस तुम एकदम चुपचाप मेरे साथ उस मज़े के मज़े लो.

और उससे इतना कहकर मैंने उसके गोल मटोल गोरे बूब्स के तने हुए गुलाबी निप्पल पर अपने होंठ रख दिए और फिर उन्हें चूसने लगा और दूसरे बूब्स को सहलाने दबाने लगा. फिर वो उफ्फ्फ आह्ह्ह्हह्ह माँ ऊउईईई करने लगी.

और फिर कुछ देर बूब्स से खेलने के बाद जब वो ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ लेने लगी और पूरी तरह से गरम होने लगी तो सही मौका देखकर उसके मना करने के बाद भी जल्दी से बिना समय गंवाए उसकी पेंटी को भी उतार दिया और अब में उसकी पेंटी को अपने हाथ में लेकर उसे सूंघने लगा.

मैंने आज पहली बार ऐसी खुशबू सूँघी थी. फिर मैंने उसकी पेंटी को उससे दूर फेंक दिया और अब मैंने उसकी चूत पर अपने होंठ रख दिए और अपनी जीभ से चूत के दाने को सहलाने लगा. मेरे ऐसा करने की वजह से वो एकदम तड़प उठी और अब वो मेरे सर को अपनी चूत के ऊपर दबाकर ज़ोर ज़ोर से मोन करने लगी.

और वो मुझसे बोली कि हाँ शुभम उफफ्फ्फ्फ़ चूसो और चूसो ऊईईईईईईई आह्ह्ह्ह हाँ शुभम मज़ा आ गया और अब वो पूरी तरह से जोश में आकर मेरा सर कुछ ज्यादा ही ज़ोर से अपनी चूत के मुहं पर दबाने लगी. शायद वो आज मुझे अपनी चूत में पूरा अंदर डालकर मुझसे अपनी चूत को चटवाकर साफ करवाना चाहती थी.

फिर मैंने करीब 15 मिनट तक उसकी चूत को चाटा, तब तक वो शायद एक बार झड़ चुकी थी. मैंने उसका सारा गरम चूत रस चाट लिया और अब मेरी बारी थी. फिर उसने मेरी शर्ट को उतार दिया और वो मुझसे बोली कि तुमने अपनी बॉडी तो बहुत अच्छी बनाई है.

फिर उसने मुझे ज़ोर से हग किया और बोली कि आज तुम मेरा सारा अकेलापन दूर कर दो, मेरी प्यासी चूत को अपने लंड से चोद चोदकर आज तुम बिल्कुल शांत कर दो और फिर उसने मुझसे मुस्कुराते हुए कहा कि पहले मुझे अपना हथियार तो दिखावो.

और मैंने तुरंत अपना अंडरवियर उतार फेंका और सीधा लेट गया. वो मेरा तनकर खड़ा हुआ मोटा और लंबा लंड देखकर एकदम से चौंक गई. फिर वो मुझसे बोली कि इतना बड़ा, मैंने इतना बड़ा कभी नहीं देखा और वो अब मेरा लंड अपने मुहं में लेकर चूसने लगी, मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

फिर करीब 15 मिनट तक वो लगातार मेरा लंड चूसती रही और फिर मैंने उससे कहा कि तुम अब लेट जाओ और फिर उसके लेटने के बाद में तुरंत उसके ऊपर आ गया और मैंने उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए और सही मौका देखकर उसकी प्यासी, कामुक, गीली चूत की गहराईयों में अपना लंड उतार दिया, जिसकी वजह से वो ज़ोर से उछल पड़ी.

और फिर मैंने महसूस किया कि उसकी चूत बहुत गरम थी और मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मैंने जलती हुई किसी आग की भट्टी में अपना लंड डाल दिया हो. अब में लंड को धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा था. दोस्तों मेरा लंड बहुत ही आसानी से उसकी गहराईयों में चला गया और कुछ देर बाद उसे मज़ा आने लगा था. “Desi Couple Sex Masti”

फिर मैंने उससे पूछ लिया कि क्या तुमने इससे पहले कभी सेक्स किया है? तो वो मुझसे कहती है कि हाँ मैंने अपने एक बॉयफ्रेंड के साथ बहुत बार सेक्स के मज़े लिए थे, लेकिन वो मुझसे बोली कि उसका तुम्हारे लंड से छोटा था और वो बहुत ही जल्दी झड़ जाता था और वो मुझसे बोली कि में तुम्हे बहुत दिन से देख रही हूँ और मैंने पढ़ा था कि जाट लड़के बहुत अच्छी चुदाई करते है.

फिर मैंने तुरंत उससे कहा कि हाँ आज तुम वो चुदाई मेरे साथ करके देख भी लेना और उसके मज़े भी ले लेना. में अब उसको लगातार ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदने लगा और वो ऊह्ह्ह्हह्ह उफफ्फ्फ्फ़ माँ मर गई आहह्ह्ह्ह कर रही थी और अपनी गांड को उठा उठाकर मेरा पूरा पूरा साथ दे रही थी.

अब वो मुझसे बोली कि प्लीज थोड़ा और अंदर जाने दो उफफफफ. दोस्तों करीब एक घंटे में वो पांच बार झड़ चुकी थी और वो मुझसे बोली कि में बहुत थक गई हूँ, प्लीज थोड़ा जल्दी जल्दी करो. फिर पूरे 1:30 घंटे की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद में झड़ गया और मैंने अपना पूरा वीर्य उसकी चूत में डाल दिया.

वो मुझे बहुत खुश दिख रही थी और फिर हम साथ में बाथरूम में जाकर नहाए और फिर शाम को फिल्म देखने चले गये और फिर रात को उसका मेरे पास कॉल आया तो उसने मुझसे कहा कि जल्दी से मेरे रूम में आ जाओ. फिर में रात के करीब 9 बजे उसके रूम में चला गया और मैंने उसके रूम के अंदर पहुंचते ही उसको हग किया. “Desi Couple Sex Masti”

फिर हम दोनों लेटकर बातें करने लगे और कुछ देर बाद वो मुझसे बोली कि आज सारी रात हमें चुदाई करनी है. फिर मैंने उससे कहा कि नहीं जानेमन तुम थक जाओगी, तो वो बोली कि आज हमारे पास बहुत अच्छा मौका है, क्या पता कल हो ना हो?

तो मैंने उसको तुरंत पूरा नंगा किया और रात के करीब दस बजे से उसको चोदना शुरू किया, जब में झड़ने वाला होता तो में तुरंत रुक जाता और इस वजह से में झड़ता नहीं था. हमें चुदाई करते करते रात के करीब एक बज गए थे, लेकिन मेरी चुदाई अब भी ज़ारी थी और वो थककर बिल्कुल चूर हो गई थी.

इस बीच वो बहुत बार झड़ गई थी. अब वो मुझसे कहने लगी कि तुम इंसान हो या जानवर, तुम इतना देर तक कैसे चोद लेते हो? अब वो बहुत कमजोरी महसूस कर रही थी और हिल भी नहीं पा रही थी. फिर मैंने उससे कहा कि जाट लड़को से चुदना कोई आसान काम नहीं है.

वो अब लगातार आह्ह्ह्हह्ह उफफ्फ्फ्फ़ आईईईइ हाँ और ज़ोर से चोदो मुझे बड़बड़ा रही थी और में भी उसकी चुदाई का पूरा पूरा मज़ा ले रहा था और फिर में करीब 2 बजे झड़ गया. अब वो मुझसे बोली कि आज से में तुमसे ही अपनी चुदाई करवाउंगी. “Desi Couple Sex Masti”

फिर वो सोने लगी, लेकिन मैंने उसे सोने नहीं दिया और बात करने लगा, उसके जिस्म से खेलने लगा और फिर कुछ देर बाद मेरा लंड फिर से दोबारा तनकर खड़ा हो गया. मैंने फिर से उसको चोदना शुरू किया और इस बार मैंने उसको घोड़ी बनाकर चोदा और वो अब रो रही थी और मुझसे कह रही थी कि उसका शरीर अब काम नहीं कर रहा है.

मैंने उसको घोड़ी बनाकर सुबह 5 बजे तक कुछ देर रुक रुककर चोदा और फिर वो मेरे झड़ने के बाद सो गई और में भी उससे चिपककर सो गया और फिर में सुबह 8 बजे उठा और मैंने तब देखा कि मेरे ऑफिस जाने का टाईम हो गया था. फिर मैंने उसे सोता हुआ देखकर उसके माथे पर एक किस किया और अपने रूम में आकर नहाकर तैयार हुआ और जब में अपने ऑफिस पहुँचा तो उसका मेरे पास कॉल आया, उसने मुझसे कहा कि क्यों तुमने मुझे उठाया भी नहीं?

तो मैंने उससे कहा कि तुम रात भर बहुत थक गई थी, इसलिए में तुम्हें उठाए बिना ही चुपचाप वहां से आ गया. तब वो मुझसे बोली कि कल रात को तुमने मुझे बहुत मज़े दिए और वो बोली कि मुझे बुखार आ गया है. फिर हम सारा दिन व्हाटसप पर चेट करते रहे. उसने मुझे अपनी एक पूरी नंगी फोटो भी भेजी और फिर वो मुझे शाम को मेरे रूम के बाहर मिली और फिर मैंने अपने रूम का दरवाजा खोला और एक बार फिर से हम चुदाई करने लगे और इस तरह हमने बहुत बार चुदाई की.

मेरी गांड मरवाने की इक्षा। New Gay Bottom Sex Stories

New Gay Bottom Sex Stories में पढ़ें कि एक युवा लड़का गे सेक्स में कैसे शामिल हुआ। मर्दों की पैन्ट में उनके लंड पर उसका ध्यान गया।

फ़्रेंड्स, मेरा नाम शोएब है और मैं गुजरात से हूँ।

पढ़ी थी।

मैं एक गे हूँ। मेरी उम्र अभी 26 वर्ष है।

यह New Gay Bottom Sex Stories आज से छह साल पहले की है जब मुझे मर्दों का लंद भी पसंद आने लगा।

जब मैं किसी पोस्टर पर किसी हीरो या मॉडल को देखता था, तो मेरा पहला विचार उनकी टांगों के बीच में जाता था।

तब किसी प्यासी लड़की की तरह मेरी नजरें उसकी चौड़ी छाती पर घूमने लगीं।

मेरी कामुक निगाहें सिर्फ उनकी पैंटों में लंड की जगह पर टिक जाती थीं जब वे चलते आते जाते थे।

मैंने बार-बार सोचा कि मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है..। क्या यह सिर्फ मेरे साथ होता है या दूसरों के साथ भी होता है?

मेरे पास इसका कोई उत्तर नहीं था।

मैं जानता था कि मेरे जैसे बहुत लोग हो सकते हैं।

जब मैं फेसबुक पर जा रहा था, एक बार मुझे लगता था कि मैं किसी ऐसे आदमी की खोज करूँगा जो अपना लंड दिखाएगा।

यही सोचकर मैं खुद अपनी गांड पर हाथ फेरने लगा।

मैंने अपनी गांड पर हाथ फेरा तो एक और विचार आया कि पॉर्न फिल्मों में लंड वाले आपस में क्या करते हैं।

मैंने एक पॉर्न वेबसाइट खोली जिसमें आदमी आदमी से सेक्स करते हैं।

इसके बाद ही गे शब्द मेरे सामने आया।

जब मैंने सिर्फ गे शब्द से संबंधित पॉर्न खोला, तो मैं एक से अधिक चिकने मर्दों को पाया, जिनके सेक्सी लंड थे।

अब उन पॉर्न तस्वीरों और वीडियो को देखकर मुठ मारा या गांड में उंगली किया जा सकता था, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता था।

फिलहाल मुझे अपनी गांड की प्यास बुझानी जरूरी लगी।

मैं फिर से पॉर्न देखने लगा।

मैंने एक पोर्न फिल्म में देखा कि एक आदमी अपनी गांड में रबर का नकली लंड डाल रहा था।

मैं भी ऐसा ही करना चाहता था जब मैंने देखा।

फिर मैंने एक गोल मोमबत्ती ली और उसे अपनी गांड में डालने का प्रयास किया।

वह अंदर चली गई।

मैं बहुत खुश था।

मैंने सोचा कि अगर मैंने आज मोमबत्ती डाली, तो कल मैं इससे भी बड़ा और मोटा कुछ डालूंगा।

तभी मुझे फ्रिज में गाजर रखना याद आया।

मैंने सोचा कि कल क्यों नहीं उसे आज भी डाल दूँगा।

धीरे-धीरे मैंने फ्रिज से गाजर निकाली और उसे अपनी गांड में डालने लगा।

वह भी मेरे गांड में बड़ी ही आसानी से घुस गया।

दोस्तो, मैं उसके बारे में सोचकर पूरी रात सो नहीं पाया।

मैंने दूसरे दिन निर्णय लिया कि कुछ भी हो जाएगा..। मैं अब किसी मर्द का वास्तविक लंड लूंगा।

फिर मैंने सोचा कि मैं किसी ऐसे आदमी को खोजूँगा जो मेरी बात सुनेगा और मेरी गांड में अपना लंड डाल देगा।

मैंने फिर से फेसबुक खोला।

मैं उसके सर्च बार में गया और गे ब्वॉय खोजने लगा।

बहुत से लोगों के नाम आए। सब गे थे।

मैं खजाना पाया था।

लेकिन अपनी निजी सुरक्षा के लिए मैंने अपने दूसरे फोन नंबर से एक फर्जी फेसबुक आईडी बनाया।

फिर क्या हुआ? मैं अपने जैसे लोगों से बात करने लगा।

मैं जल्दी एक मर्द खोजना चाहता था।

तब एक बंदे ने एक संदेश में पूछा कि क्या आप ऊपर या नीचे हैं?

मैंने पूछा: ये क्या है?

तो उसने पूछा कि क्या आपको लंड लेना या पेलना अच्छा लगता है?

हां, मैं लेना बहुत पसंद करता हूँ, मैंने कहा।

तो उसने कहा, “यह बताता है कि आप एक बॉटम हैं।”

मैंने आपको क्या बताया?

उसने कहा कि मैं सबसे अच्छा हूँ। लोगों की गांड मारने में मुझे मज़ा आता है।

मैंने अपनी गांड मारने की तैयारी करते हुए उससे पूछा: क्या तुम मेरी गांड मार देंगे?

तो उसने कहा: हां, मैं बिल्कुल मार डालूंगा।

फिर उसने पूछा कि आप कौन सी शहर से हैं?

मैंने कहा, “दहोद!”

तो उसने कहा कि मैं भी दाहोद से हूँ।

फिर उसने मेरी उम्र पूछी, तो मैंने कहा कि बीस साल।

शायद वह बहुत अधिक खुश था।

मेरी छोटी उम्र को देखते हुए, उसने मुझसे पूछा कि तुम अब तक कितने का लंड ले चुके हो?

अब तक किसी भोसड़ी वाले का लंड सामने से देखा तक नहीं था, इसलिए कितने खा चुके हो?

मैंने फिर भी पूछा, “तुमको उससे क्या लेना देना है?” आप सिर्फ हां या ना में अपनी राय व्यक्त करें।

हां, यार, मुझे तुम्हारी लेने में खुशी होगी, उसने जल्दी से कहा। क्या तुम मुझे अपनी गांड मरवाओगे?

मैं भी हामी भर गया।

अब उसने मेरी फोटो मांगी, जो मैंने दी।

फिर उसने कहा कि मैं एक कमरे में रहता हूँ, तुम आओगे?

मैंने हां कहा।

उसने सूचना दी और आने को कहा।

मैं सिर्फ दस मिनट में वहाँ पहुँच गया।

मैं उसे फोन करने ही वाला था कि मैंने फोन नंबर नहीं लिया था।

मैं उसकी प्रोफाइल में उसका फोन नंबर खोजने के लिए फोन पर फेसबुक खोला।

तब एक आदमी मेरे सामने आया। उसने रूमाल से अपना चेहरा ढक लिया।

तुम अंतिम हो? उसने पूछा।

मैंने हां कहा।

मेरे पीछे आओ, उसने कहा।

मैं उसके पीछे चलता रहा।

मैं भी डर गया कि वह मेरे साथ कुछ और गलत न करे।

मुझे फिर एक कमरे में ले गया।

उसने दरवाजा बंद कर दिया और मुझे कसके से पकड़कर मेरे होंठों को चूमने लगा जैसे ही मैं कमरे में गया।

मैं इसका कार्य कुछ भी नहीं समझ पाया। फिर कुछ देर बाद मैं भी खुश होने लगा।

मैं भी उसके होंठों को चूसने लगा।

जल्दी से अपने कपड़े निकालो, उसने कहा। तुम बहुत नमकीन हो।

उसकी नमकीन लौंडे वाली बात सुनकर मैं बहुत खुश हो गया।

मैंने पूछा: मीठा या नमकीन बेहतर है?

मेरी बात सुनकर वह चुप ही रहा और अपने कपड़े उतारने लगा।

उसकी चुप्पी मुझे बहुत डराने लगी।

लेकिन मैं सिर्फ उसका काला मोटा लंड देखता रह गया।

मैं आज सब कुछ पा चुका था। मैंने जल्दी से अपने कपड़े उतार दिए।

उसने मेरा गोरा, चिकना बदन देखा और कहा, वाह, क्या सुंदर है।

फिर उसने मुझे इशारे से अपने पास बुलाया और लेट गया।

मैं उसके पास बैठ गया और उसे सहलाने लगा। उसके लिंग का फन फैल गया।

उसने वासना से मेरी तरफ देखा और कहा कि मुँह में ले लो।

मैंने तुरंत लंड को अपने मुँह में डाल लिया।

उम्म..। मैं बहुत खुश था।

मैंने न्यू गे बॉटम सेक्स का आनंद लिया।

मैं कभी-कभी उसके लंड को चाटने की कोशिश करता, तो कभी-कभी पूरा लौड़ा मुँह में लेने की कोशिश करता।

उसने मेरा सर पकड़ लिया और अपना पूरा लंड मेरे गले में डालने लगा, लेकिन पूरा नहीं गया।

“अपने गले को ढीला करो”, उसने कहा और धीरे-धीरे मेरे मुँह को चोदना शुरू कर दिया।

उसने अपना पूरा बल लगाकर मेरे मुँह को चोदने लगा जैसे ही मैंने अपने गले को ढीला किया।

मैंने तुरंत उसके लंड को मुँह से निकालकर खाँसने लगा।

फिर मैंने उससे कहा कि ऐसा फिर से मत करो क्योंकि मुझे साँस लेने में परेशानी होती है।

प्रिय, उसका मोटा लंड मेरे गले में घुसते ही ऐसा लगा कि वह मेरा गला फाड़ देगा। मैं उसका लंड पूरा अपने हलक में उतारने में सक्षम नहीं था।

उसने मेरे गले को दबाने के बाद मेरा गला थोड़ा फूल गया।

मैं इससे मरने वाला था।

फिर उसने मुझे चाटना शुरू किया। मुझे बहुत मजा आने लगा था और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

मैं उछल पड़ा जब उसने मेरी गांड में उंगली डाली।

फिर उसने पूछा की क्या यह पहली बार ले रहा है?

मैंने हां कहा।

उसने कहा कि झूठ नहीं बोलना चाहिए।

मैंने कहा कि यह सच है, यह मेरा पहली बार है।

फिर भी उसे मेरी बात पर विश्वास नहीं था। उसने अपने खड़े लंड को मेरी गांड के सुराख पर रखा और तेज झटका मारा।

उम्म्ममाह, मेरी गांड में उसके लंड का सुपारा घुस गया।

उसने अपना लंड बाहर नहीं निकाला, हालांकि मैं बहुत रोया।

मैं चिल्लाया, “आहह..।”

उसने फिर हंसते हुए कहा, “गांड ढीली कर साले!”

मैं बहुत दुखी था।

उसने फिर एक झटका दिया और पूरा लंड अंदर डाल दिया।

मैं दर्द से पागल हो गया। मैं वहाँ से भाग जाना चाहता था।

इसके बाद उसने धक्के मारना शुरू कर दिया।

थोड़ी देर बाद मैं भी खुश हो गया।

वह लगभग बीस मिनट तक मुझे गांड मारते रहा।

फिर वह अचानक तेज हो गया।

मैं कुछ समझने के लिए तैयार होने से पहले ही उसने कहा, “आह छूट गया।”

उसने मुझसे पूछे बिना ही अपना वीर्य मेरी गांड में छोड़ दिया।

लेकिन उसके झटकों से मैं इतना खुश था कि मैंने कुछ नहीं कहा।

फिर उसने पिस्टल निकालकर पूछा, “बस.. या और कुछ करना है?”

मैंने कहा कि मुझे वीर्य पीना था।

वह मेरी बात सुनकर खुश हो गया और कहा-चल ठीक है। अब मेरा लंड चूस।

मैंने अपनी गांड से निकला हुआ लंड मुँह में लेकर चूसने लगा।

थोड़ी ही देर में फिर से उसका लंड खड़ा हो गया। उसने मेरे मुँह और कानों को चोदने लगा।

थोड़ी देर में वह मेरे मुंह में गिर गया और मुझे खट्टा स्वाद दे गया।

अब अपने कपड़े पहन लो, उसने कहा।

मैं अपने कपड़े भी नहीं पहन पा रहा था क्योंकि मेरी गांड इतना दर्द कर रही थी।

जैसे-तैसे मैंने अपने कपड़े पहने और वहां से भाग गया।

मित्रों, आपको लगता है कि ये मेरी पहली New Gay Bottom Sex Stories थी?

एक दुसरे की बहनों की अदल बदल कर चुदाई – Bhai-Bahan Chudai Kahani

इरशाद और जुनेद दोनों स्कूल के समय से दोस्त हैं। तब दोनों के एक गन्दा चस्का लग गया था, दोनों स्कूल से निकल कर अक्सर शहर के बाहर जाकर सेक्सी किताबें पढ़ा करते थे | और एक दूसरे की मुठ मारा करते थे। वे अक्सर अपने क्लास की अध्यापिकाओं के बारे में सोच कर मुठ मारते थे तो कभी पड़ोस की भाभी और चाची को सोच कर उनके बारे में बातें किया करते थे, उनको बाथरूम में नहाते देखने के लिए दिन-दिन भर छत पर रहा करते थे। एक दिन जुनेद बोला- यार इरशाद, आखिर ऐसे कब तक हम मुठ मारते रहेंगे? अब तो इन किताबों से मज़ा नहीं आता है। कोई फिल्म देखने का जुगाड़ करते हैं। Brother Sister Sex Story
इरशाद ने कहा- तेरी बात तो सही है जुनेद | कल मेरे अम्मी-अब्बू शहर से बाहर जा रहे हैं, घर पर सिर्फ छोटी बहन सकीना रहेगी। हम दोनों अपने कमरे में कल ब्लू फिल्म देखते हैं।
जुनेद बोला- ठीक है दोस्त, कल मैं कोई नई फिल्म की सीडी लाता हूँ, तू तैयार रहना | लेकिन घर में सकीना यानि सकीना होगी..?
जुनेद ने शंका से पूछा। तू फ़िक्र मत कर जुनेद | सकीना कमरे में नहीं आएगी। चल अब घर चलते हैं। अगले दिन जुनेद इरशाद के घर एक ब्लू फिल्म की सीडी लेकर पहुँच गया।
सकीना ने दरवाज़ा खोला- अरे जुनेद भाई जान…? कैसे हो? इरशाद भाई जान तो अम्मी अब्बू को स्टेशन तक छोड़ने गए हैं, इरशाद भाई जान आते ही होंगे, आप अन्दर आ जाओ। चलो, तब तक हम लूडो खेलते हैं।
जुनेद अन्दर चला गया। सकीना उसके लिए पानी लेकर आई। जब वह पानी दे रही थी तब जुनेद की नज़र उसकी कुरते से झांकते छोटे छोटे उभारों पर थी। वह जुनेद को इरशाद की तरह ही भाई मानती थी लेकिन आज वह जुनेद अचानक बहुत ही सेक्सी लग रही थी, जुनेद ने उसके जिस्म को ऊपर से नीचे तक देखा। जुनेद ने उससे कहा- सकीना, आज भाई जान की गोदी में नहीं बैठोगी? क्यों नहीं भाई जान अभी लो | कहते हुए वह जुनेद की गोदी में बैठ गई। अब बोलो, आइसक्रीम खिलाओगे? खिलाऊंगा | लेकिन एक वादा कर कि किसी को बोलेगी नहीं? क्या भाई जान?? सकीना की उम्र मात्र 18 साल की थी, उस पर अभी जवानी धीरे धीरे आ रही थी, उसके सीने पर हल्का हल्का उभार आने लगा था, उसके स्तन छोटी अम्बिया की तरह नुकीले थे। जुनेद ने उसको गोद में लेकर उसकी गोलाइयों को अपने हाथों से नापना शुरू कर दिया। ही ही ही..||| यह क्या कर रहे हो भाई जान गुदगुदी होती है | जुनेद का हाथ उसकी फ्राक अन्दर उसकी चड्डी में था, वह सकीना की छोटी सी नर्म योनि को सहला रहा था- कैसा लग रहा है सकीना…? जुनेद ने उसके गालों को चूमते हुए पूछा। अच्छा लग रहा है भईया | यह एक खेल है सकीना, लेकिन सिर्फ हम दोनों ही खेलेंगे, चुपके चुपके, किसी और को मत बताना।
ठीक है जुनेद भईया |
अन्दर चलो, बेड पर लेट जाओ तुम। जुनेद ने उसको गोद में उठा लिया था, वह उसके सीने से चिपकी थी, जुनेद के हाथ उसके चूतड़ों पर थे, जुनेद ने सकीना को बेड पर लिटा दिया और उसकी छोटी से गुलाबी चड्डी खींच कर निकाल दी।
उसकी योनि छोटी सी थी अन्दर से देखने पर एकदम सुर्ख | जुनेद ने उस पर जीभ लगा दी। ..उईए ईई यह क्या करते हो भाई जान…? सकीना मचल पड़ी जब जुनेद ने उसकी योनि चूसना चाही। कुछ नहीं होगा तुझको | बस तू चुपचाप लेटी रह, तुझे अच्छा लगेगा। कह कर जुनेद ने उसकी टांगें फैला दी और उसकी योनि पर मुँह लगा दिया। सकीना लेटी हुई थी। तभी दरवाज़े की घंटी बजी, जुनेद ने झट से सकीना की फ्राक नीचे की और उसको उठाया और कमरे से बाहर ले गया।
सकीना ने दरवाज़ा खोला।
क्या कर रही थी? सुनाई नहीं देती तुझको घण्टी?|| इरशाद सकीना पर चिल्ला कर बोला।
सकीना सहम गई।
अरे जाने दे न इरशाद, नहीं सुना होगा | …मैं भी रूम में था वरना… जुनेद ने बात सम्हालनी चाही।
बच्ची नहीं है… घोड़ी हो गई है, पढ़ती-लिखती कुछ नहीं है, दिन भर लूडो और टीवी | दसवीं में फेल हो चुकी है। कहते हुए इरशाद ने उसको एक चपत लगाई।
जुनेद ने देखा कि पीछे से सकीना की फ्राक की चैन खुली थी, देखते ही उसकी गांड फट गई। लेकिन फिलहाल इरशाद ने उस पर ध्यान नहीं दिया था।
दोनों कमरे में चले गए, इरशाद ने सीडी लगाई और सकीना को बोला कि अन्दर नहीं आना है।
मूवी में एक अँगरेज़ एक इंडियन लड़की की चुदाई कर रहा था। कुछ ही देर मैं एक अँगरेज़ और एक लड़की और आ गई, वे दोनों भी शुरू हो गए थे, बारी-बारी से दोनों लड़कियों की चुदाई कर रहे थे उनको कुतिया बना कर।
जुनेद और इरशाद दोनों को पसीना आ रहा था, तभी इरशाद ने बेड़ पर पड़ा कपड़ा उठा कर अपना मुँह पोँछा। लेकिन उसमें से उसको अजीब सी महक लगी, उसने कपड़ा खोल कर देखा यह सकीना की चड्डी थी जिससे इरशाद ने मुँह पोंछा था। देखने पर वह सोचने लगा कि सकीना की चड्डी यहाँ क्या कर रही है?
जुनेद का दिल धड़क रहा था, वह इरशाद से नज़रें चुराने लगा, उसने सकीना को आवाज़ दी और रिमोट से मूवी को बन्द कर दिया।
सकीना कमरे में आई, अभी इरशाद के हाथ में उसकी चड्डी थी, लग रहा था कि वह उससे पूछेगा कि यह यहाँ कैसे?
इरशाद- यह ले, तेरे कपड़े हैं और दोबारा मेरे कमरे में नहीं आना चाहिए।
सकीना सहम गई अपनी चड्डी लेकर वह कमरे से चली गई।
जुनेद ने मूवी को दोबारा शुरु की और इरशाद के डाऊन हो गए लंड को सहलाने लगा।
इरशाद- उसको छोड़ साले, यह बता तू सकीना के साथ क्या कर रहा था?
जुनेद- अरे || कुछ तो नहीं यार..||
इरशाद- झूट मत बोल, मुझे चुतिया समझ रहा है? मैंने देखा कि उसकी फ्राक पीछे से पूरी खुली थी, उसकी चड्डी यहाँ क्या कर रही थी.?? और दरवाज़ा खोलने में इतनी देर क्यों हुई…?? सच बता कि तूने सकीना के साथ क्या किया था?
जुनेद- बताता हूँ लेकिन तुझको दोस्ती की कसम | तू गुस्सा नहीं होगा।
इरशाद- पहले तू बता हरामी…?? वरना तुझे भी मारूँगा और सकीना को भी मारूँगा।
जुनेद- पहले तू कसम खा की तू गुस्सा नहीं होगा।
इरशाद- ठीक है | …बता…?
जुनेद- सकीना अब बड़ी हो गई है, उसके स्कूल में लड़के भी पढ़ते हैं और आज कल का मोर्डेन ज़माना है, हर लड़की का आजकल बॉयफ्रेंड है, कल सकीना का भी होगा।
इरशाद- मारूँगा पकड़ के उस माँ के लौड़े को |
जुनेद- तू पहले मेरी बात सुन | हर वक़्त तो तू सकीना के साथ रह नहीं सकता, और न ही उसको घर में बंद करके रख सकता है…
इरशाद- तू कहना क्या चाहता है?
जुनेद- अबे, तू मेरी बात सुन तो सही मेरे दोस्त | तू सकीना के हर समय साथ तो नहीं घूम सकता है, कल को उसका कोई यार भी होगा तो उसकी लेगा भी।
इरशाद- जुनेद, तू बकवास बंद कर |
यार, तू मेरी बात को ठन्डे दिमाग से समझ..पहले बता बॉयफ़्रेन्ड होगा तो लेगा या नहीं उसकी?
इरशाद- हाँ लेगा ही.||
समस्या यह नहीं है कि कोई बॉयफ़्रेन्ड उसकी लेगा, परेशानी यह है कि आजकल लड़के लड़कियों को ब्लैकमेल करने के लिए उनका वीडियो बना लेते हैं.. और फिर अपने दोस्तों को दिखाते हैं और उसको नेट पर डाल देते हैं। तू चाहेगा कि कोई सकीना के साथ ऐसे करे? या उसको ग्रुप सेक्स करने के लिए मजबूर करे…??
इरशाद- हरगिज़ नहीं…
जुनेद- लेकिन हर लड़की आजकल बॉयफ़्रेन्ड चाहती है…आखिर सकीना अब जवान हो रही है… मैं उसको अपनी गर्लफ्रेंड बनाना चाहता हूँ इरशाद |
मैंने इरशाद का लंड सहलाते हुए कहा।
इरशाद- साले भईया बोलती है वह तुझे… मैं ऐसा कैसे मान लूँ?
जुनेद- इरशाद, बात को समझ कल को कोई उसको बेहरहमी चोदे, उसकी चुदाई की वीडियो, MMS बनाये, हम उसके नंगी फोटोग्राफ्स नेट पर देखें, तुझे अच्छा लगेगा? ..यार मैं उससे प्यार करता हूँ, मेरे साथ रहेगी तो सुरक्षित रहेगी… कोई और चोदे इससे तो बेहतर है। बाकी तू जो मांगेगा, वह मैं दूंगा |
कह कर जुनेद इरशाद के सामने कुत्ते की तरह खड़ा हो गया।
इरशाद- नहीं जुनेद, मैंने तेरी गांड तो बहुत ली है। मैं तुझे सकीना का चोदू तो बन जाने दूंगा लेकिन मेरी एक शर्त है।
जुनेद- क्या…?? बोल…?? दोस्त के लिए तो जान भी हाज़िर है यार…|
इरशाद- मैं तेरी बाजी हमीदा की लूँगा। जुनेद- यह क्या कह रहा है…?? हमीदा बाजी तेरे से बड़ी हैं, और मोटी भी है वह |
जुनेद ने यह नहीं सोचा था कि इरशाद इस कुत्तागिरी पर उतर आएगा।
इरशाद- देख जुनेद, मैं तेरे फायदे की बात कर रहा हूँ। सकीना छोटी भी है और उसका किसी से कोई चक्कर भी नहीं है, जबकि हमीदा… कोई लड़का छोड़ा है उसने गली का?..जिसके साथ सोई न हो। जिसका उसने लिया न हो? 4 दिन घर से गायब रही थी, मुझे मालूम है गोवा में आरिफ और अनुज के साथ थी, फोटो देखे हैं मैंने तेरी बहन के चड्डी में और नंगे भी, गोवा के बीच पर.. और तेरी अम्मी कहती रही कि खाला के घर गई है। सोच ले फ़ायदा तेरा ही है।
जुनेद- बस कर यार मुझे भी सब मालूम है…लेकिन यार हमीदा बाजी नहीं मानेगी…
तू उसकी फ़िक्र मत कर वह मुझ पर छोड़ दे | तेरी बाजी (बड़ी बहन) है इसीलिए अब तक कुछ नहीं किया था।
ठीक है तू हमीदा बाजी को पटा, मैं सकीना के साथ कुछ करता हूँ।
इरशाद- तेरी बाजी को मैं अभी लाया 10 मिनट में |
जुनेद- नहीं उसको पटाना इतना आसान भी नहीं है, नहीं ला सकता तू उसको 10-15 मिनट में।
इरशाद- शर्त लगाता है? अगर ले आया तो उसकी तेरे सामने लूँगा।
जुनेद- चल शर्त लगी।
ठीक है | और नहीं ला पाया तो मैं तेरी छोटी बहन सकीना की तेरे सामने पूरी नंगी करके लूँगा…??
ठीक है, अभी आया 10 मिनट में तेरी चुदक्कड़ बाजी हमीदा को लेकर |
कह कर इरशाद चला गया। इधर जुनेद ने सकीना को बुला कर उसको ब्लू फिल्म दिखाना शुरू कर दी, उसे मालूम था कि इरशाद शर्त हार जाएगा और वह उसकी छोटी बहन सकीना की लूँगा।
जुनेद ने सकीना को नंगा करके अपनी गोद में बिठा रखा था, उसका हाथ उसकी मासूम छोटी सी योनि को सहला रहा था और वह आः आआह्ह्ह कर रही थी।
जुनेद ने उसको बेड पर लिटा दिया और उसकी योनि में मुँह लगा दिया था- आह… उई… उम्म… जुनेद भाई जान… छोड़ दो।
फिर जब सकीना पूरी तरह जोश में आ गई तो जुनेद ने उसको कुतिया बनाया बेड पर और उसके पीछे से उसकी योनि पर लंड रख दिया।
अभी लंड का अग्र भाग (टोपी) अन्दर गई ही थी कि तभी दरवाजे की घण्टी बज गई।
जुनेद ने देखा कि अभी मात्र 15 मिनट हुए थे और शायद इरशाद आ गया था।
तय शर्त के मुताबिक जुनेद कमरे से बाहर निकल कर छुप गया, इरशाद हमीदा बाजी के साथ था। बाजी ने पीला कुरता और सफ़ेद सलवार पहन रखी थी।
उसने हमीदा को कमरे में किया और मेरे पास आया, बोला- देखा जुनेद, मानता है मुझे | अब शर्त के अनुसार तू खिड़की में से अपनी बाजी की चुदाई का कार्यक्रम देख।
जुनेद- छोड़ न यार, मैं तो मजाक कर रहा था | मैं नहीं देखूंगा.. तू जाने दे उसको।
इरशाद- देखना तो पड़ेगा | आखिर शर्त लगाई है तूने मुझसे | यह ले स्टूल और खड़ा हो जा खिड़की पर |
जुनेद ने खिड़की से झांक कर देखा हमीदा बाजी मज़े से ब्लू फिल्म देख रही थी।
इरशाद कमरे में चला गया, उसने हमीदा बाजी के पहले कंधों पर हाथ रखा और फिर कुछ कुछ सेकंड में उसका सफ़ेद दुपट्टा गले से अलग कर दिया। इरशाद ने बाजी को अपने सीने से लगा लिया।
जुनेद ने सोचा नहीं था कि एक दिन अपनी बड़ी बहन को इस तरह से अपने ही दोस्त से चुदते देखूंगा।
हमीदा की पीठ जुनेद तरफ थी, इरशाद ने जुनेद को आँख़ मारते हुए अंगूठे से उसकी तरफ इशारा किया, उसने बाजी के कुर्ते की चेन खोलना शुरू की और दूसरा हाथ उसका बाजी के चूतड़ों पर था।
जुनेद को बड़ा अजीब सा लग रहा था, अपनी बहन को अपने सामने नंगा होते हुए देख रहा था।
हमीदा की पीठ पर उसका हाथ था और हमीदा बाजी उसके होंठो से होंठ लगाए हुए थीं।
तभी इरशाद थोड़ा सा अलग हुआ और उसने बाजी की सलवार का कमरबंद (नाड़ा) खोल दिया।
सफ़ेद पटियाला सलवार सरकती हुई फर्श पर जा गिरी, तभी जुनेद एक आईडिया सूझा, जुनेद ने सकीना को अपने पास बुला लिया और उसको गोदी में लेकर खिड़की से अन्दर का नज़ारा दिखाया।
वह खिलखिला कर हँस पड़ी, जुनेद ने उसको चुप रहने का इशारा किया।
हमीदा बाजी और इरशाद भाई जान भी यह सब खेलते हैं? सकीना ने मासूमियत से पूछा।
हाँ, वे दोनों दोस्त हैं। जुनेद ने खिड़की से झांककर देखा- हमीदा बाजी इरशाद का लंड चूस रही थी और इरशाद खड़ा था।
हमीदा बाजी को देख कर अब जुनेद के अन्दर सेक्स पैदा होने लगा था। वह उसे अब बड़ी बहन नहीं बल्कि एक जवान खूबसूरत लड़की लग रही थी।
इरशाद ने हमीदा को बेड पर पटक दिया था और उसकी काली चड्डी निकाल कर अलग कर दी और उसकी टांगे फैला कर उसकी योनि को चूस रहा था।
हमीदा बाजी सिसकारियाँ भर रही थी, मैंने झट से सकीना को पकड़ा और उसकी चड्डी निकाल दी और उसकी योनि पर मुँह लगा दिया, उसकी छोटी सी योनि पर हल्का सुनहरा रोंया था और वह पूरी तरह गुलाबी थी।
सकीना आह हाह अह करने लगी थी। फिर जुनेद का शानदार लण्ड सकीना के मुख के सामने था- आह | गोरा सा, तना हुआ सुपारा जोश से लाल सुर्ख हो रहा था। हाय क्या चीज़ बनाई है ऊपर वाले ने |
जुनेद ने अपना लंड सकीना को चूसने को लिए उसके मुँह में दे दिया, दूसरे ही पल उसका लाल सुपारा सकीना के नाजुक होंठों के बीच दब गया। सकीना मेरे लंड को लोलीपोप की तरह चूस रही थी। जुनेद ने खिड़की से झांक कर देखा इरशाद ने हमीदा बाजी को कुतिया बनाया हुआ था और वह बाजी की पीछे से चुदाई कर रहा था, बाजी जोर जोर से सिसकारियाँ निकाल रही थी। बाजी की चोटी इधर-उधर डोल रही थी और चूड़ियाँ खन-खन कर रही थी। बाजी का जम्पर (कुर्ता) इरशाद ने एकदम ऊपर खिसकाया हुआ था। इरशाद जुनेद की बहन की ले रहा था ज़बरदस्त चुदाई कर रहा था, बड़ी बहन छोटे भाई के सामने चुद रही थी और जुनेद चुपचाप देख रहा था।
जुनेद ने झट से सकीना को भी कुतिया बना दिया और उसके पीछे से अपने लंड को करने लगा। लेकिन बाजी और सकीना में बहुत फर्क था, सकीना मात्र 18 साल की थी जबकि बाजी की उम्र २३ साल की थी। जुनेद की बहुत कोशिश करने के बाद भी लंड सकीना की योनि में नहीं गया और ज़बरदस्ती जुनेद करना नहीं चाहता था।
उधर इरशाद बाजी को अपनी गोद में लेकर अपने लंड को अन्दर-बाहर कर रहा था।
बाजी आह अआह कर रही थी, हमीदा बाजी पूरी तरह से सेक्स की आदी थी, कॉलेज का बहाना कर के वह अनुज और आरिफ के साथ 4 दिन तक गोवा में रही थी और जब वापस आने के लिए पैसे ख़त्म हो गए थे तो उन्होंने हमीदा बाजी को कई अंग्रेजों से चुदवा कर पैसे भी कमाए थे। सोच कर ही अजीब लगता है कि किस तरह से बाजी ने दो-दो अंग्रेजों का लिया होगा। देखने में तो एकदम भोली भाली और मासूम दिखती थी। अगर दो चोटी बांध दो तो किसी स्कूल की बच्ची लगती हैं। लेकिन सच यह था कि मेरी बाजी पूरी तरह से किसी रांड से कम न थी। इरशाद ने उसको कुतिया बनाया हुआ था और उसके पीछे से उसकी चूत को मार रहा था और ..बाजी आ आह्ह्ह …आह… ह… ह… कर रही थी।
हाय चूस… ओह… आह्ह… मेरी जान… ले… मेरा… लण्ड ले ले .. मस्त चूसती है रे तू |
इरशाद उसकी लण्ड चुसाई से मस्त हो रहा था। अपना मस्त लण्ड चुसा कर फिर उसने हमीदा बाजी को खड़ा कर के एक झटके में नंगी कर गोदी में उठा लिया। दस सेकण्ड बाद ही बाजी बिस्तर पर थी। उसने बाजी की टांगें चौड़ी कर दी और चूत को मस्ती से चाटने लगा। अब बाजी अन्ट-सन्ट बकने लगी थी- ओह माई डियर… लूट ले मुझे… आह चूस ले साले… डाल दे अपना लौड़ा मेरी चूत में |
अब वो बाजी के ऊपर छा गया। उसने अपना सात इन्ची लण्ड मेरी बाजी की चूत से टकरा दिया। चूत को पूरी गीली हो कर लसलसी सी चिकनी हो गई थी। जुनेद का शरीर सनसना उठा, फ़चाक से पूरा ही लण्ड मेरी बाजी की चूत में उतर गया। आह … स्स्स्सीऽऽऽ कैसे भाई हो… तुम मेरे इरशाद? बाजी मस्ती में चहकी। चुप साली, मैं तेरा भाई नहीं हूँ। इरशाद ने कहा। सगा ना सही, पर दूर के तो हो ना, कहीं का नहीं छोड़ा मुझे, आह्ह, चोद के ही छोड़ा ना मुझे | हमीदा ने उसे उकसाया।
इधर सकीना जुनेद लंड चूस रही थी और वो खिड़की से अन्दर का नज़ारा देख रहा था। फिर इरशाद ने बाजी के होंठों पर अपने होंठ दबा दिये और उसे कचकचा कर चूसा और काट लिया। चूत में मोटा लौड़ा लेकर अपने होंठ चुसवाने का मजा कुछ ओर ही होता है, यह तो वो ही जानती है जो इस तरह से कभी चुदी हो। आह्ह हमीदा की चूत भी तभी फ़चफ़चा कर झड़ गई। शायद इसी मजे के लिये पैसे वालों की लड़कियाँ भी रांड बन जाती हैं। थोड़ी देर के बाद उसने अपना लण्ड निकाल लिया, जुनेद ने उसे प्रश्नवाचक दृष्टि से देखा। उसने अपना लम्बा लण्ड बाजी की दोनों चूचियों के बीच में रख दिया…| बाजी भी अब बेड पर गिर पड़ी थी, दोनों पूरी तरह से एकदम प्राकृतिक अवस्था मैं नंगे थे। जुनेद ने सकीना को अपने लण्ड से अलग किया और दबे पाँव उनके कमरे में गया। बाजी जुनेद को देख कर एकदम घबरा गई, उसने अपना दुपट्टा खींचते हुए पूछा- जुनेद तुम यहाँ…?? मैंने आप को सबकुछ करते हुए देखा है बाजी | मैं तो आप को बहुत सीधी सादी समझता था। लेकिन आप तो एक नंबर की रांड निकली। अब छुपाने से क्या फ़ायदा | आपकी यह मस्त लीला मैंने और सकीना दोनों ने देखी है | जुनेद बोला।

इरशाद- सकीना…?? वह कहाँ थी..??

इरशाद सकीना का नाम आते ही उछल पड़ा- वह यहाँ थी | कहते हुए जुनेद ने सकीना को अपने पीछे से आने को कहा। सकीना उन दोनों के सामने थी, उसने छोटा सा फ्राक पहन रखा था जिसमें उसके चूतड़ और छोटी सी नर्म गुलाबी चूत साफ़ दिख रही थी।
सकीना- भाई जान, मैंने सब देखा है, अम्मी को बोलूंगी, आपकी और हमीदा बाजी की शिकायत करूंगी।
इरशाद- नहीं मेरी प्यारी गुड़िया रानी, अम्मी को मत बोलना | मैं तुझे आइसक्रीम लाकर दूंगा।
हमीदा- हाँ सकीना, मैं तुझे चॉकलेट लाकर दूंगी..
जुनेद पूरी तरह से सकीना को सिखा-पढ़ा कर लाया था कि क्या बोलना है।

सकीना- मुझे नहीं चाहिए आइसक्रीम | मुझे आप लोगों के साथ खेलना है | सकीना ने उंगली दिखाते हुए कहा।
एकदम सही कह रही है सकीना | अब हम लोग भी साथ में खेलेंगे।

कहते हुए जुनेद ने सकीना को अपनी गोद में उठा कर चूमते हुए उसको बिस्तर पर लिटा दिया। लेकिन सकीना मेरी छोटी बहन है यार… मैं उसके साथ कैसे सेक्स कर सकता हूँ? इरशाद ने किलसते हुए कहा।

अच्छा तुम्हारी बहन – बहन है और मेरी बहन क्या रंडी है? तो क्या हुआ हमीदा बाजी भी तो मेरी बड़ी बहन है जिसको तुमने रंडी की तरह चोदा है? जुनेद बोला।

इरशाद- यार तू समझा कर जुनेद | चल ठीक है, तू अपनी बाजी हमीदा की मार ले लेकिन मैं सकीना के साथ नहीं करूंगा, कुछ भी |

हमीदा- पागल हो गए हो क्या इरशाद |?| जुनेद मेरा सगा भाई है, मैं उसके साथ नहीं कर सकती | हमीदा बाजी ने नाराज़ होते हुए कहा।
उनकी नज़र जुनेद की निक्कर पर थी जिसमें से उसका गीला लण्ड साफ़ चमक रहा था। जुनेद, प्लीज अम्मी को कहना नहीं। बाजी ने जुनेद के चेहरे पर हाथ रख कर कहा। मैं भी कुछ नहीं बताऊँगी। सकीना भी रण्बीर से चिपक कर बैठ गई।
सकीना, तू तो मेरी बहन है ना, मुझे माफ़ कर दे, जाने ये सब कैसे हो गया। इरशाद हकला कर बोला।

नहीं बताएँगे कुछ भी अम्मी को | हम लोग सब साथ में खेलेंगे | जुनेद बाजी के घुटनों से चादर खींचते हुए कहा।
जुनेद | लेकिन यह गलत है। कहते हुए बाजी ने अपनी टाँगें ढीली कर दी। तभी जुनेद के दोनों हाथ हमीदा बाजी के सनसनाते हुए उरोजों के उभारों पर आ गये और फिर उन्हें दबा दिया। हमीदा सिसक उठी, उसकी काम ज्वाला भड़क सी उठी। जुनेद का लण्ड कठोर होकर जैसे हमीदा बाजी की कमर में ही घुसने लगा था।

भाई जान, कुछ करने को मन कर रहा है। उसकी कमर कुछ कुछ कुत्ते की तरह चलने लगी थी। सकीना ने इरशाद की गोद में बैठते हुए कहा।
भाई, नहीं कर, मैं तो तुम्हारी बहन हूँ ना, ऐसे मत सीना दबाओ। इधर हमीदा जुनेद की हरकतों से पूरी तरह से जोश में आ गई थी। सकीना भी इरशाद की गोद में जोश में लहराने लग गई थी। उसका मन अब चुदने को होने लगा था। छोटे से मासूम तन में बिजली की चटखन होने लगी थी। बहुत अच्छा लग रहा है बहना | इरशाद वासना में डूब कर डूबते उतराते हुये जैसे कसमसा रहा था।

मुझे भी बहुत मजा आ रहा है, पर तुम मेरे भाई हो ना आह रे, अब बस करो, ओह नहीं थोड़ा सा और करो |
आह्ह्ह, मेरी प्यारी बाजी, घर की बात है बस चुपके चुपके लण्ड ले लेना, बस एक बार अपनी चूत में मेरा लण्ड ले लो। मोहल्ले के हर लड़के का तो ले चुकी हो आप बाजी। अब अपने छोटे भाई जान का भी ले लो एक बार। जुनेद के हाथ हमीदा जिस्म पर कसने लगे। उसने हमीदा को कमर पकड़ कर उठा लिया और बिस्तर पर लेटा दिया। हमीदा कामुक हो कर अपने भाई से चिपकती जा रही थी। अब वो जुनेद ऊपर चढ़ गई थी और बेतहाशा चूमने लगी थी, उसकी चूत गीली हो गई थी। अभी अभी जैसा उसने फ़िल्म में देखा था, सकीना ने कहा- भाई जान, अपना लण्ड तो चूसने दो, मजा आयेगा।
उसने जल्दी से खुद की फ्राक उतार दी। अब तक इरशाद भी जोश में आ चुका था। वह अपनी छोटी बहन सकीना की लेने के लिए तैयार था।
तब जुनेद ने भी अपने कपड़े उतार दिये।
आह |
सकीना की छोटी सी गुलाबी फ़ुद्दी कैसी पानी पानी हो रही थी। इरशाद का गोरा लण्ड कैसा मस्त हो कर लहरा रहा था। उसने उल्टा सुल्टा पोज बना कर लण्ड को सकीना के मुख की ओर कर दिया और खुद का मुख सकीना की फ़ुद्दी की तरफ़ कर दिया। इरशाद ने अपने चूतड़ सकीना के मुख पर दबा दिये। लण्ड चुटकी के मुख में आ चुका था।
हमीदा- जुनेद भाई, तू चाट ना मेरी फ़ुद्दी |
तभी हमीदा की चूत को एक ठण्डा सा मीठा सा अहसास हुआ। भाई की जीभ हमीदा की चूत में घुसने की कोशिश कर रही थी। जुनेद ने अपनी बाजी की चूत चाटनी आरम्भ कर दी थी, हमीदा उसका लण्ड फ़िल्म की भांति मस्ती से मुख में लेकर गपागप चाट रही थी।
जुनेद बेकाबू सा होने लगा था, हमीदा को लगा कि उसके भाई का लण्ड अपनी बाजी को चोदने के लिये तड़प रहा था।
तभी इरशाद ने पलट कर सकीना को दबा लिया- बस बहना बस | अब नहीं रहा जाता है।
उसका स्वर काम आवेग से थरथरा रहा था।
भाई जान, मुझसे भी नहीं रहा जा रहा है | सकीना भी चुदाने को आतुर आवेश से कांप रही थी।
इरशाद ने सकीना को लिपटा लिया और उसके होंठ चूसने लगा। तभी उसका सख्त लण्ड की ठसक सकीना की चूत में महसूस होने लगी। उधर जुनेद का लण्ड हमीदा बाजी की चूत में घुसता जा रहा था।
सकीना बेसुध होने लगी थी, काम में अंधी होकर भाई से ही चुदवाना चाह रही थी। शरीर आग का गोला बन गया था। जैसे ही इरशाद ने एक झटका मारा, सकीना की चीख पूरे कमरे में गूंज उठी, दर्द के मारे वो अपनी सुध-बुध खो चुकी थी।
जुनेद अपनी बाजी की चूचियों को नोच खसोट कर उसे जन्नत की सैर करा रहा था, बाजी चूत उछाल उछाल कर भरपूर जवाब दे रही थी, कस कर चुदाई हो रही थी, कमरे में भीगी चूत की फ़च फ़च आवाजें गूंजने लगी।
जब हमीदा झड़ गई तो भी जुनेद शॉट पर शॉट मार रहा था। हमीदा लस्त सी नीचे चूत की पिटाई सह रही थी।
हमीदा ने जुनेद को धीरे धीरे करने को कहा। उधर सकीना की चूत गीली थी और इरशाद का लंड हर धक्के के साथ अंदर समाता जा रहा था, थोड़ी ही देर में पूरा लंड अंदर समा गया। फिर वो थोड़ी देर उनसे लिपट कर यों ही पड़ा रहा और उनकी चूचियों से खेलता रहा।
अब तक दर्द के साथ कुछ मजा आने लगा था, उसकी सिसकारियाँ शुरु हो गई थी- आआ ह्ह ओह्ह ओफ्फ्फ्फ उम्म्म अह्ह्ह्ह अह |
सकीना ने अपने भाई को कस कर पकड़ रखा था, फिर इरशाद ने धीरे धीरे चोदना शुरु किया, दोनों टाँगों को पकड़ा और अपनी स्पीड तेज़ की।
हमीदा ने जुनेद को कहा- अब बस कर | अब नहीं सहा जा रहा।
इस पर जुनेद ने इरशाद को कहा- तू बाजी के साथ आ जा, सकीना को मैं चोदूंगा।
सकीना सातवें आसमान में थी और पूरे जोश में भी | और लगातार उसकी सिसकारियाँ बढ़ रही थी।
जुनेद इरशाद को हटा कर सकीना पर छा गया।
धीरे धीरे जुनेद की गति तेज़ होती जा रही थी और सकीना की सिसकारियाँ भी |
अब बाजी ने इरशाद के लण्ड को अपने मुँह में ले लिया और कुछ ही समय में इरशाद हमीदा के मुख में झड़ गया और उनके ऊपर ही लेट गया।
उस दिन जुनेद ने अपनी बाजी हमीदा और सकीना दोनों को चोदा और इरशाद कभी हमीदा बाजी को चोदता तो कभी सकीना को।

पड़ोस की दीदी के साथ पहला सेक्स- 2

 में आपने पढ़ा कि मैं अपने पड़ोस की सेक्सी माल दीदी को पसंद करता था उनसे मेरी दोस्ती भी थी. एक बार मैंने उन्हें गुंडों से बचाया तो मुझे चोट लगी थी. वे मुझे अपने घर ले गयी और मेरी चोट का इलाज किया.

उसके बाद हम दोनों धीरे धीरे वासना के सागर में गोते खाने लगे. हम आपस में चुम्बन करते करते नंगे हो गये. दीदी की नंगी चूत पर मेरे लंड की रगड़ से उनका पानी निकल गया.
तब दीदी ने मुझे 69 सेक्स की वीडियो दिखाकर कहा कि हम भी ऐसे ही करते हैं.

अब आगे हॉट न्यूड सेक्सी लड़की की पहली चुदाई:

पोर्न देखने के बाद मेरी समझ में आ गया था कि मुझे क्या करना है।

मैं और दीदी 69 पोजिशन में लेट गए और उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह में भर लिया.
मुझे मजा आ रहा था इसलिए मैंने भी दीदी की चूत को चाटना शुरू किया, उसे चूमना शुरू किया।

पहली बार मुझे किसी लड़की की चूत को चाटने का अनुभव मिला जो मुझे गुड्डी दीदी ने दिया।

मेरे दीदी की चूत को चाटना शुरू करते ही दीदी अपने नितम्बों को हिलाने लगी; वे जोर जोर से सिसकारने लगी और तेजी से मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया।

दीदी की जीभ मेरे लंड के सुपारे पर लगते ही मेरे रोम रोम में करंट दौड़ जाता और मैं भी तेजी से अपनी जीभ गुड्डी की चूत में दौड़ाने लगता जिससे हम दोनों अपने ऊपर कन्ट्रोल खोते जा रहे थे.

मेरे लंड को दीदी ने चूस चूस कर लाल कर दिया था और मैंने दीदी की चूत को पानी पानी कर दिया.
जिससे दीदी ने दोबारा से अपना पानी छोड़ दिया जो कि सीधा मेरे मुंह में गया.

जिसका स्वाद मुझे बहुत ही अच्छा लगा और मैं हॉट न्यूड सेक्सी लड़की की चूत का सारा पानी पी गया।

तब तक मेरा लंड भी मस्ती में हो चुका था क्योंकि दीदी की गर्म जीभ ने उसे पहले से भी टाइट कर दिया.

दीदी ने झड़ने के बाद मेरे लंड को और तेजी से चूसना शुरू कर दिया और मैं सिसकारियां लेने लगा था।
मैं दीदी को कहने लगा- गुड्डी आई लव यू … मेरे लंड को ऐसे ही चूसो. मेरी जान, चूसती रहो … इसको खा जाओ जान! मेरी ड्रीम गर्ल हो तुम!

मैंने दीदी को अपना दिल का हाल सुना दिया कि कैसे मुझे उनके साथ रहना अच्छा लगता है. जब से वे आई थी. मैंने कैसे उनके साथ रहने के लिए क्या क्या नहीं किया।

मैं इतनी मस्ती में था कि मैंने कॉलेज में एडमिशन लेने की बात भी उन्हें बता दी कि मैंने उनके साथ रहने के लिए उनके कॉलेज में एडमिशन लिया।

ये सब सुनते ही दीदी ने मेरे लौड़े को अपने दोनों स्तनों के बीच दबा लिया और उसे दबा कर वो और तेज तेज से मेरे लौड़े को अपने स्तनों से ऊपर नीचे करने लगी.
और 5 मिनट के बाद एक दर्द के साथ मेरे लंड ने भी वीर्य छोड़ दिया जो सीधा गुड्डी के मुंह पर जाकर गिरा।

अब हम दोनों निढाल हो गए थे क्योंकि हम पिछले डेढ़ घंटे से अपनी मस्ती में लीन थे।
शाम के 3:30 बज गए थे।

हम दोनों की मम्मी शाम को आने वाली थी तो हमारे पास अभी भी 2 घंटे बाकी थे।

5 मिनट के बाद दीदी ने फिरसे मेरे लंड को पकड़ा और मेरी आंखों में देखा और मेरे होंठों को चूम लिया।

हम दोनों बेड पर लेटे हुए थे दीदी मेरी साइड में थी.
वे मुझे चूमती जा रही थी और बार बार मुझे ‘आई लव यू रॉकी’ बोल रही थी.
साथ ही में दीदी अपने हाथ से मेरे लंड को भी हिला रही थी।

मैं भी दीदी को चूमने में साथ देने लगा और उनकी चूत पर उंगली घुमाने लगा.
साथ ही साथ मैं उनकी चूत में उंगली करने लगा.

जब भी मैं ऐसा करता, दीदी मेरे लंड को जोर से दबाती और जोर से हिलाती।

हम दोनों एक दूसरे को तैयार कर रहे थे क्योंकि इस आगाज का अंजाम एक ही था … चुदाई … जो हम दोनों को चाहिए था.

इसलिए 10 मिनट चूमने, हिलाने और उंगली करवाने के बाद गुड्डी दीदी उठी और मुझे अपने ऊपर ले लिया.

अब दीदी मेरे नीचे थी मैं उनके ऊपर आ गया.

दीदी ने मेरे लंड को पकड़ा और अपनी चूत पर लगा लिया।
लगाने के बाद मैंने अपने लंड को दीदी की चूत में घुसाना शुरू किया.
लेकिन लंड घुसा नहीं दीदी की चूत में … वह बहुत ही टाइट थी.

दीदी की चूत गीली तो बहुत थी पर लंड 1 इंच से ज्यादा अंदर ही नहीं जा रहा था.
तब दीदी ने मुझे धक्का मारने को बोला.

मेरे धक्का मारते ही दीदी की चीख निकली और मेरा आधे से ज्यादा लंड दीदी की चूत में रास्ता बनाते हुए चला गया।

दीदी की चीख निकलने के बाद मैं रुक गया क्योंकि मेरे लंड में भी दर्द हुआ था और मैं घबरा गया क्योंकि दीदी की चीख इतनी जोरदार थी कि मुझे डर हो गया कहीं घर पर कोई आ ना जाए.

तब दीदी की आंखों में आंसू आ गए थे … पर दीदी मुझे छोड़ने को तैयार नहीं थी।

शांत होने के बाद दीदी ने मुझे पूरा लंड अंदर करने को कहा और मैंने एक झटके के साथ पूरा लंड दीदी की चूत में घुसा दिया।

मेरा लंबा और मोटा लंड दीदी की चूत में पूरी तरह समा चुका था.

दीदी को आराम देने के लिए मैंने उनके स्तनों को चूमना और चूसना शुरू कर दिया।

5 मिनट ऐसे ही चूमने और चूसने के बाद दीदी ने धक्के मारने के लिए बोला।
मैंने धक्के मारने शुरू किए और दीदी भी मेरा साथ देने लगी.
वे कहने लगी- हां ऐसे ही रॉकी, चोदो अपनी गुड्डी को चोदो!

पूरे कमरे में केवल हम दोनों की सीत्कार और चुदाई की आवाज गूंज रही थी।
मुझे और गुड्डी को मजा आ रहा था.
हम दोनों आपस में एक दूसरे के होठों को चूस रहे थे और हमारी चुदाई चल रही थी.

10 मिनट के बाद दीदी ने पोजिशन चेंज करने को कहा और वे मेरे ऊपर आ गई.

मेरे ऊपर आने के बाद दीदी ने मेरा लंड अपनी चूत पर सेट किया.
मैंने देखा कि गुड्डी की गुलाबी चूत खून से भीगी हुई थी और मेरा लंड भी खून से सना हुआ था.

जब तक मैं कुछ पूछता, तब तक दीदी मेरे लंड के ऊपर बैठ चुकी थी.
मेरा लंड धीरे धीरे दीदी की चूत में जा रहा था और मुझे दुनिया का सबसे बड़ा आनंद मिल रहा था।

दीदी की चूत में घुसते घुसते मेरा लंड दीदी सिसकियां ले रही थी और अपने होठों को काट रही थी।

पूरा लंड अंदर जाने के बाद मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरा लंड किसी ऐसी गर्म जगह में है जहां कुछ भी पिघल जाए और मैं अपने लंड को निकालना भी नहीं चाहता था.
लंड पूरा लेने के बाद दीदी के चेहरे पर ऐसे भाव आ गए कि उनकी कोई पुरानी इच्छा पूरी हुई हो.

वे पूर्ण संतुष्ट थी.
लेकिन मजा तो तब आना शुरू हुआ जब दीदी ने ऊपर नीचे होना शुरू किया.

दीदी मेरे लंड पर कूदने लगी, वे जोर जोर से मेरे लंड पर कूद रही थी और मैं भी नीचे से उन्हें उछाल उछाल कर उनका साथ दे रहा था।

मेरी गुड्डी दीदी तो मानो पागल हो गई थी, वे अपनी पूरी ताकत के साथ उछल रही थी. वे मेरे लंड को पूरा बाहर निकलती और फिर उसे पूरा अंदर ले लेती.
और साथ ही में हर बार जब भी ऐसा करती तो उनकी चूत में से फच्च की आवाज आती.

यह आवाज हर बार आ रही थी और मुझे यह आवाज सुनकर ही मदहोशी हो रही थी.
मैंने दीदी को अपनी बांहों में पकड़ लिया और नीचे से ही चोदना शुरू कर दिया.

दीदी ने भी अपनी बांहों से मुझे पकड़ लिया और अपने नितम्बों को उछालने लगी और मेरा भरपूर साथ देने लगी.

तब दीदी और मैं तो बस एक अलग ही दुनिया में पहुंच गए थे.
दीदी ने मेरे निप्पल को मुंह में भर लिया और चूसने लगी.

मेरा भी जोश चरम सीमा पर था, मैंने भी गुड्डी को और तेजी से चोदना शुरू कर दिया था.

तेजी बढ़ते ही गुड्डी की सिसकारियां चीखों में बदल गई थी.
वे चीख चीख कर मुझे ना रुकने को कह रही थी.
दीदी मुझे और तेज करने को कह रही थी.

वे उछल रही थी तेजी से … और मैं भी अपनी पूरी ताकत से उन्हें नीचे से चोद रहा था.
मेरा जोश पूरा उत्कर्ष पर पहुंच गया, मैंने एक झटके से दीदी को बांहों में पकड़ कर अपने नीचे ले लिया, उनके होठों को कस कर पकड़ लिया और चोदने की स्पीड बढ़ा दी।

पूरे घर में बस हम दोनों की चुदाई की आवाजें गूंज रही थी.
हम दोनों एक दूसरे को ना रुकने को बोल रहे थे.

गुड्डी दीदी तो दीवानी सी हो गई थी, बार बार ‘आई लव यू रॉकी … आई लव यू रॉकी’ बोल रही थी.
वे मुझे बिना रुके चोदने को बोल रही थी और रफ्तार बढ़ाने को बोल रही थी.

अब क्योंकि मैं जिम जाने वाला लड़का था तो मेरे अंदर ना रुकने की भावना आ चुकी थी और मैं लगातार दीदी को चोदता रहा.

इस बीच में हॉट न्यूड सेक्सी लड़की 2 – 3 बार झड़ चुकी थी.
उन्होंने 3 बार मेरे लंड को अपने पानी से नहला दिया था।

लगातार डेढ़ घंटे की जोशीली और यादगार चुदाई के बाद मैंने अपना वीर्य दीदी की चूत में ही छोड़ दिया और दीदी के ऊपर ही लेट गया.

शाम के 5 बजकर 10 मिनट हो चुके थे और हम दोनों ने चुदाई खत्म कर ली थी.

अब हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे और प्यार से लिपट कर लेटे रहे।

हम दोनों का मन और चुदाई करने का था.
लेकिन क्योंकि हम दोनों की मम्मी आने वाली थी इसलिए हमने बाद में और चुदाई करने की सोची.
और तभी हम दोनों बाथरूम में नहाने चले गए.

लेकिन हम दोनों से रुका णा गया तो नहाते नहाते ही जल्दी से एक राउंड और चुदाई का कर लिया।

हम बाहर आए मेरी पैंट भी सुख चुकी थी इसलिए मैंने अपने कपड़े पहने और ड्राइंग रूम में बैठ गया.

6 बजने में 15 मिनट बाकी थे और हमें भूख भी लग रही थी।

करीब 6 बजे गुड्डी दीदी की मम्मी आ गई और उन्होंने खाना बना दिया।

गुड्डी दीदी ने कॉलेज की बात भी बताई की कैसे मैंने उन लड़कों की पिटाई की और मेरे पैर पर चोट लग गई।

आंटी ने मेरी तारीफ की और उन्होंने दीदी को मुझे पार्टी देने को बोला.
लेकिन उन्हें कहां पता था कि हमने तो ऐसी पार्टी करी है जिसके बारे में आंटी सोच भी नहीं सकती थी।

अगले 3 दिन मैं और दीदी कॉलेज नहीं गए क्योंकि मैंने अपने पैर का बहाने रेस्ट लिया और दीदी ने मेरी देखभाल करने का जिम्मा।

इन अगले 3 दिनों तक हमने खूब चुदाई की और अपनी अधूरी बची चुदाई को पूरा किया।

तो दोस्तो, आप सभी को यह हॉट न्यूड सेक्सी लड़की की पहली चुदाई कहानी कैसी लगी?
मुझे जरूर बताना.

और आगे की कहानी जानने के लिए मेरी इस कहानी को प्यार देना।

गाँव वाली बुआ की गांड चुदाई का मजा

देसी बुआ गांड चुदाई का मजा मैंने लॉकडाउन के दिनों में गाँव में लिया. बुआ और मैं साथ साथ समय बिताते थे और काफी घुल मिल गए थे.

दोस्तो,
मेरा नाम सत्यम है.
मैं 19 साल का हूँ.

मेरी बुआ का नाम रेखा है. वे बहुत सेक्सी व हॉट हैं. उनका फिगर 34-32-38 का है.

बुआ फूफा जी के साथ दिल्ली में रहती हैं. जबकि मेरा गांव फ़ैज़ाबाद जिले में है.
आज मैं अपनी देसी बुआ गांड चुदाई की कहानी बताने जा रहा हूँ.

पिछले साल लॉकडाउन से पहले मैं गांव गया था, तभी लॉकडाउन लग गया था.
उन दिनों मेरी बुआ भी गांव में ही थीं.

यह उस दिन की बात है, जब मेरी बुआ गांव आई थीं.
मैंने ही उन्हें सबसे पहले देखा था.

उनके घर में आते ही मैंने उन्हें नमस्ते किया.
बुआ ने मुझे अपने सीने से लगा लिया.

उनके सीने की नर्मी से कलेजा हिल गया; उनके ठोस दूध मेरे सीने में गड़ से गए.
मुझे बेहद सुखद लगा और लंड में झनझनी सी आ गई.

एक दो पल के इस मीठे अहसास से मेरे जवान लंड ने एकदम से उठ कर बुआ की टांगों के बीच में फन मारा तो बुआ ने मुझे अलग कर दिया और मेरी आंखों में देखती हुई मुस्कुरा दीं.

मैं झेंप गया और बुआ का सामान लेकर अन्दर वाले कमरे में रखने लगा.

बुआ सबसे बातचीत करने लगीं.
उसके बाद लॉकडाउन लग गया तो सब कुछ बदल गया.
यूं ही दिन बीतते गए.

एक दिन घर पर कुछ कार्यक्रम था.
गाँव का माहौल था तो लॉकडाउन में भी किसी तरह से आस पास के गांवों से सब रिश्तेदार आ गए थे.

मेरी बुआ की बहुत जमती थी. हम दोनों खूब मस्ती करने लगे थे.

उस रात सोने के लिए घर में जगह कम पड़ गई थी.
मैं, बुआ, मेरी चाची की बेटी हम सब एक ही कमरे में सो गए.

बुआ और चचेरी बहन बगल में एक खाट पर सो गई थीं.
मैं पलंग पर लेटा था.

मुझे उस दिन बुआ के मम्मों का अहसास करके लंड हिलाने का बहुत मन कर रहा था.

मैंने पॉर्न देख कर मुठ मारी और स्पर्म गद्दे पर गिरा दिया.
गद्दे पर वीर्य के दाग पड़ गए.

सुबह हुई.
बुआ ने गद्दे पर देखा और बोलीं- यह क्या है … किस चीज़ का दाग है.

मैं कुछ नहीं बोला.
लेकिन बुआ शायद समझ गई थीं.

अब हम लोग टीवी देख रहे थे.
बुआ लेटी थीं, उनके पैर बेड के नीचे लटक रहे थे.

मेरी बुआ उल्टी लेटी थीं.
मैंने बुआ की गांड पर सर रख दिया.
वे कुछ नहीं बोलीं.

इतना हम दोनों के बीच चलता था.
मेरी बुआ हंस कर बोलीं- देखते रहना, कहीं गैस न निकल जाए!

मैं एक बार तो उठ गया और उनकी गांड पर हल्के से एक थप्पड़ मारा.
मेरी बुआ उन्ह बोलीं और हंसने लगीं.

शाम को मैं और बुआ एक साथ बेड पर लेटे थे.
मैं सोने का नाटक कर रहा था.

बुआ टीवी देख रही थीं.
मैं करवट लेकर बुआ से सट गया.
मेरा लंड बुआ की गांड की दरार में लग रहा था.

बुआ की गांड कुछ कुछ हिलने लगी थी.
उससे मेरा हथियार खड़ा होने लगा.

उसी वक्त मुझे बुआ के मम्मों की फिर से याद आ गई और मेरा लंड एकदम कड़क हो गया.

बुआ को मेरे कड़क लंड का अहसास होने लगा.
उस वजह से बुआ थोड़ा आगे को हुईं तो मैं नाटक करते हुए फिर से बुआ से सट गया.
वे कुछ नहीं बोलीं.

कुछ देर में ही हम दोनों अपने अपने सामान हिलाने लगे.
बुआ गांड हिला रही थीं और उनके दोनों चूतड़ों के बीच में मेरा कड़क लंड चल रहा था.

अब जवान लंड था तो गर्मी जल्दी भड़क गई और मैं भी अपनी कमर चलाते हुए बुआ की गांड में कपड़ों के ऊपर से ही लंड पेलने लगा.

ऐसे करते करते मेरा पानी निकल गया.
सारा पानी मेरी चड्डी और पजामे में निकला था, तब भी पानी की नमी का अहसास बुआ को अपनी गांड में हो गया था.

मैं सो गया.
कुछ देर बाद मैं उठा, तो बुआ जा चुकी थीं.

मैंने कमरा बंद किया.

कपड़े उतारे और लंड को साफ किया, फिर बाहर गया.

दूसरे दिन फूफा जी आ गए थे.
रात को फूफा जी भी कमरे में थे.

मैं बुआ और चचेरी बहन खाट पर लेटी थीं.
फूफा जी पलंग पर थे.

रात के एक बजे का समय हुआ था.
मैं जग रहा था.

बुआ खाट से उठीं और फूफा जी के पास आ गईं.
कुछ देर बाद दोनों में चुदाई चलने लगी.

बुआ के मुँह से धीरे धीरे ‘आ आ उः उः उः.’ निकल रहा था.
मुझे सब सुनाई दे रहा था.

मैं गर्म हो गया.
लाइट ऑफ होने की वजह से मैं सारा खेल थोड़ा थोड़ा ही देख पा रहा था.

मेरा मन तो कर रहा था कि अभी बुआ को चोद दूँ, पर नहीं कर सकता था.
रात को चुदाई के बाद सब सन्नाटा छा गया. हम सब सो गए.

सुबह हुई.
मैं जल्दी 6 बजे ही उठ गया.

तब बुआ सोई हुई थीं.
फूफा जी बाहर चले गए थे.

मैंने बुआ की गांड को ऊपर से सूँघा, तो मस्त महक आ रही थी.
बुआ ने लैगी पहनी थी.
मैं बस हाथ फेर कर बाहर आ गया.

दोपहर में फूफा जी वापस चले गए थे.
मैं, बुआ और चचेरी बहन लूडो खेल रहे थे.

रात हुई, तो बुआ बोलीं- सत्यम तुम पलंग बाहर कर दो और खाट पर ही आ जाओ. सब मिल कर लूडो खेलते है. फिर तीनों लोग यहीं सो जाएंगे.
मैंने कहा- ठीक है.

हम सबने लूडो खेला, फिर सोने की बारी आई.
मैं बुआ के बगल में लेट गया था.

सब सो गए.
मैं बुआ की गांड पर हाथ फेर रहा था.

मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.
मैंने अपना लंड लोवर के अन्दर से ही बुआ की गांड पर सटा दिया और उनसे चिपक गया.
मैं उनकी पीठ को भी चूम रहा था.

सुबह हुई, बुआ छत पर थीं.

चचेरी बहन स्कूल गई थी.
मैं दूसरे रूम में गया, जिसमें बुआ का बैग रखा था.

मैंने उनका बैग खोला और पैंटी निकाल कर सूंघने लगा.

आह क्या मस्त महक आ रही थी.
मैंने एक हाथ से पैंटी नाक से लगाई और दूसरे हाथ से लंड की मुठ मारी.
रस झाड़ कर मैं दूसरे कमरे में आ गया.

बुआ नहाने जा रही थीं.
मैंने देखा कि बुआ आज पैंटी नहीं पहनी थी क्योंकि उनके हाथ में पैंटी थी ही नहीं.

उन्होंने ब्रा भी नहीं ली थी. बस लोवर और टी-शर्ट ली थी.

जब वे नहा कर सिर्फ लोअर और टी-शर्ट पहन कर निकलीं तो क्या मस्त गांड दिख रही थी.
मेरा मन कर रहा था कि दौड़ कर जाऊं और बुआ की गांड को मसल दूँ.

कुछ देर बाद दोपहर हुई तो बुआ फूफा जी से वीडियो कॉल पर बात कर रही थीं.
मैं उस वक्त उनके पीछे लेटा था.

मैं अपना फोन चला रहा था.
बुआ का मुँह दूसरी तरफ था.

बुआ को वीडियो में देखने के बहाने से मैं बार बार अपना लंड बुआ की गांड को टच करा रहा था.
इससे बुआ को भी शायद मज़ा आ रहा था.
उन्होंने अपनी गांड और पीछे को कर ली.

अब मैं बुआ से सटा हुआ था.
काफी देर तक लंड की रगड़ का मजा लेने के बाद बुआ सो गईं और मैं बाथरूम में जाकर लंड हिला आया.

उसी रात को हम लोग साथ में सोने लगे.
मैं सो गया था.

अचानक रात को मुझे महसूस हुआ कि मेरा लंड कोई छू रहा है.
मैं समझ गया कि ये बुआ हैं.
क्योंकि दिन में लंड की गर्मी से बुआ भी गर्म हो गई थीं.

मैं चुपचाप लेटा रहा.
मैंने कुछ भी अहसास नहीं दिलाया कि मैं जाग रहा हूँ.
मैं बस मज़े ले रहा था.

बुआ कुछ देर बाद सो गईं, पर मैं गर्म हो गया था.
तब रात के एक बजे का समय हो रहा था.

मैंने बुआ की चूचियों पर हाथ रख दिया और धीरे धीरे उनके दूध सहलाने लगा.
बुआ मेरे हाथ के स्पर्श से शायद जाग गई थीं, पर उन्होंने कुछ नहीं बोला.
मैं समझ गया कि बुआ भी मजा लेना चाहती हैं.

तब मैं बुआ से सट गया और अपना लोवर नीचे सरका कर उतार दिया.
अब मैं सिर्फ़ अंडरवियर में ही था.

मैंने अपना लंड बाहर निकाल कर बुआ की गांड से सटा दिया और कड़क हो चुके लौड़े को बुआ की गांड की दरार में घिसने लगा.

बुआ को कड़क लंड से अपनी गांड रगड़वाने में मज़ा आ रहा था.
मैंने अपना हाथ बुआ की चूचियों से हटाया और उनके लोवर के पास ले गया.

मैंने बुआ का लोअर उतारने की कोशिश की.
बुआ कुछ नहीं बोलीं तो मैंने एक झटके में लोवर नीचे सरका दिया.

बुआ ने आज पैंटी नहीं पहनी थी तो सीधे गांड की दरार का मखमली अहसास हुआ.

मैंने अपना लंड बुआ की गांड में दरार में कुछ अन्दर को पेला और उनकी गांड के छेद पर रगड़ने का मजा लेने लगा था.

बुआ अभी भी सोने का नाटक कर रही थीं.

उसी समय बुआ थोड़ा और पीछे को हुईं भी, जिससे मैं बुआ की गांड का छेद महसूस करने लगा था.
उनके छेद की गर्मी लंड के सुपारे को भकभकाने लगी थी.

मैंने थोड़ी ताक़त लगाई और लंड को गांड के छेद पर रख कर ठेला.
गांड टाइट होने की वजह से लंड अन्दर नहीं गया.

मैंने लौड़े के टोपे पर थूक लगाया और दुबारा पेलने की कोशिश की.

इस बार बुआ ने भी अपनी टांगों को कुछ फैला कर छेद खोल दिया था, तो लंड का टोपा बुआ की गांड में घुस गया.
बुआ के मुँह से उहह की आवाज़ आई.

तब मैं समझ गया कि देसी बुआ गांड चुदाई की शौकीन हैं.
लंड के घुस जाने के बाद भी बुआ कुछ नहीं बोल रही थीं.

मैं बुआ के ऊपर चढ़ने की कोशिश करता हुआ उनकी गांड मारने लगा.
बुआ भी सही से औंधी हो गईं.

अब मैं बुआ के ऊपर चढ़ गया और उनकी गांड में पूरा लंड पेल कर चोट मार रहा था.
अब बुआ बोलीं- आराम से चोद भोसड़ी के … कहीं भाग नहीं रही हूँ.

मैं हंसने लगा और मैंने स्पीड बढ़ा दी.

बुआ चीख नहीं सकती थीं क्योंकि मेरी चचेरी बहन भी बगल की खाट पर लेटी थी.
मैंने बुआ के मुँह को दाब दिया और धकापेल गांड मारते हुए झड़ने वाला था.

मैं धीरे से बोला- पानी किधर टपकाऊं!
बुआ बोलीं- गांड में ही निकाल दे.

मैंने सारा माल बुआ की गांड में निकाल दिया और सीधा लेट गया.
कुछ देर बाद हम दोनों सो गए.

सुबह हुई, तो बुआ थोड़ा मटक कर चल रही थीं.
मैंने पूछा- क्या हुआ?

बुआ हंस कर बोलीं- मादरचोद ने गांड मार ली और पूछ रहा है कि क्या हुआ?
मैं हंसने लगा- मेरा कैसा लगा?

बुआ बोलीं- तुम्हारा तो फूफा से भी बड़ा है.
मैंने कहा- सच?

उन्होंने कहा- हां.
मैंने कहा- आज चूत चोदूंगा.

बुआ मुस्कुरा कर चली गईं.

फिर जब बुआ नहाने जा रही थीं, तब मैंने बुआ के कान में कहा- बुआ आज नई वाली पैंटी पहनो, मज़ा आएगा.
बुआ बोलीं- मेरे पास नई नहीं है.

मैं बोला- है, नेट वाली पहनो न!
बुआ बोलीं- साले तुम्हें कैसे पता!
मैं मुस्कुरा दिया.
वे बोलीं- ठीक है.

उसी दिन दुपहर में सब अपने अपने कमरे में सो रहे थे.
मैं और बुआ छत पर थे.

छत पर एक किचन है, जो अभी नया बना है.
उसमें अभी खाना नहीं बनता है.

मैं और बुआ धूप की वजह से उसी में लेटे थे.
मैंने बुआ से कहा- बुआ मुँह में लो ना! बहुत मन कर रहा है.

बुआ बोलीं- भक … मैं मुँह में नहीं लूँगी.
मैंने अपना लंड निकला और बुआ के होंठों के पास ले गया.

मैं ज़बरदस्ती बुआ के मुँह में अपना लंड देने की कोशिश करने लगा.
वे मुँह हटाने लगीं.

मैंने उनका मुँह पकड़ा और अन्दर दे दिया.
बुआ घूँ घूँ करके लंड चूसने लगीं.

लंड चूसने में वे पुरानी रांड जैसी थीं.
एक बार चूसना शुरू किया तो दस मिनट तक लंड चूसती ही रहीं.

अब मैं झड़ने वाला था पर मैंने बताया नहीं और जैसे ही झड़ने वाला हुआ कि तभी मैंने अपना लंड निकाला और उनके मुँह पर रस झाड़ दिया.
सारा माल बुआ के गालों पर टपक गया.

वे छी छी करके गाली देने लगीं- मादरचोद हरामी साले … फर्श पर टपका देता!
मैं बोला- चाट लो बुआ, देसी घी है.

वे बोलीं- हट साले … चल अब मेरा मुँह पौंछ!
मैंने बुआ की टी-शर्ट से ही उनका मुँह पौंछ दिया.

उसके बाद चुदाई शुरू हुई.

मैंने बुआ को नंगी करके खूब चोदा. वह सब विस्तार से बताऊंगा.
आप बताएं कि यह देसी बुआ गांड चुदाई कहानी आपको कैसी लगी.

बाप खिलाड़ी बेटी महा खिलाड़िन-2 – बाप बेटी की चुदाई

हैलो दोस्तो, मैं राकेश एक बार फिर से आप सबका स्वागत करता हूं बाप और बेटी की इस राचक कहानी में। इस कहानी के पिछले भाग(बाप खिलाड़ी बेटी महा खिलाड़िन-1) में मैंने बताया था कि रमेश अपने ऑफिस की सेक्रेटरी को होटल में ले गया और वहां पर उसने अपनी सेक्सी सेक्रेटरी की चूत जमकर चोदी.

अब आगे:

अगले दिन सुबह रमेश और रिया दोनों ही घर पहुंचे.
रमेश ने रिया को गले लगाते हुए कहा- आ गयी मेरी बिजनेसवूमेन बेटी! बता कल रात का तेरा इवेंट कैसा रहा? आगे से चला या पीछे से?
रिया- बहुत ही तगड़ा इवेंट था डैड. दोनों ही तरफ से लिया उन्होंने. ख़ासकर पीछे से।

रमेश- अरे बेटी, ऐसे इवेंट्स में आजकल पीछे वाला ही अच्छा चलता है।
रिया- हाँ डैड, समय बदल गया है अब तो मुझे भी पीछे में ही ज्यादा मजा आता है।

तभी रति बोली- पीछे मतलब! कहीं तू भी शराब तो नहीं पीने लगी?
रिया- क्या बोलती हो मां? पीछे मजा मतलब ज्यादा पैसा। कुछ भी सोचती हो आप!

रमेश-अरे इसे क्या पता बिजनेस क्या होता है? यह तो बस सास-बहू की सीरियल ही जानती है।
रमेश और रिया दोनों इस बात पर ठहाका मार कर हंसने लगे.

रति चिढ़ते हुए बोली- हाँ हाँ … मुझे नहीं मालूम बिजनेस क्या होता है, अब जाओ और जाकर दोनों फ्रेश हो जाओ।

थोड़ी देर बाद सभी फ्रेश होकर नाश्ता करने बैठ गये.
तीनों आपस में बातें कर रहे थे कि तभी रिया का फोन बज उठा.

फोन उठाकर रिया ने जवाब दिया- हाँ बोलो रत्न?
रत्न उधर से कुछ बोला।
रिया- क्या संडे? अच्छा परसों … चलो, ठीक है।
रत्न ने फिर से कुछ कहा।

रिया- क्या? दो पार्टी हैं एक साथ।
रत्न ने कुछ बोला।
रिया- दोनों बुड्ढे हैं! अम्म … हां, चलो कोई बात नहीं. हाँ कर दो तुम।
रत्न ने फिर कुछ कहा।
रिया- तुम तो जानते हो मेरा रेट, फिर भी बार-बार पूछते हो? तीस हजार।

रत्न ने कुछ जवाब दिया.
रिया- हाँ मगर अकेले आगे और पीछे का बीस हज़ार है. यहाँ दो पार्टी हैं, मेहनत भी डबल होगी।
रत्न फिर कुछ बोला.

रिया- अरे रत्न लाल कितना खाओगे! हम जैसों की खाओगे तो भगवान भी तुम्हें माफ़ नहीं करेगा।
रत्न ने उधर से कुछ कहा और रिया हंसते हुए बोली- हाहा, करने दे. बुड्ढे हैं तो क्या हुआ. तो ठीक है डन रहा, संडे रात 8 बजे के बाद और पूरे तीस हजार। बॉय।

इतना बोल कर रिया ने फोन रख दिया.
रमेश- बेटा यह रत्न कौन है?
रिया- एजेंट है डैड, कस्टमर पकड़ कर लाता है।
रति- लेकिन बेटी एक साथ दो पार्टी? तू मैनेज कैसे करेगी?

रिया- कर लूँगी मां, आखिर बेटी किसकी हूँ? और वैसे भी बूढों की ही तो पार्टी है।
रति- यह तो बहुत अच्छा काम कर रही है तू बेटी। बूढे लोगों को भी खुश कर रही है. भगवान तुझे तेरे काम में तरक़्क़ी दे।
रिया- आप दोनों का आशीर्वाद है मॉम।

रमेश- अरे तेरा भी इवेंट संडे को है।
रिया- हाँ, पर क्या हुआ?
रमेश- संडे को मेरा एक दोस्त दिल्ली से यहाँ आ रहा है मुझे भी उस दिन उसके साथ रहना पडे़गा।

रति- बस यही तो है आप दोनों बाप-बेटी का! फिर मुझे अकेले छोड़ दोगे।
रमेश- अरे तुम ग़ुस्सा क्यों होती हो? तुम तो मेरी जान हो।
रति- रहने दो, बातें मत बनाओ।
रमेश- ठीक है आज रात यह आपका गुलाम आपके कदमों में होगा।
रति-हुहं।

तीनों ने नाश्ता किया और उसके बाद रिया और रमेश दोनों निकल गये.

दिन बीत गया.
रात में रिया और रति दोनों बैठ कर टीवी देख रही थीं कि अचानक से डोरबेल बजी.

रिया ने दरवाजा खोला तो सामने रमेश था.
रमेश- तेरी मां कहाँ है?
रिया- डैड, आज मॉम बहुत गुस्से में है, जरा बच के!
रमेश अंदर आया और रति के बगल में आकर बैठ गया.

रमेश- क्या बात है, नाराज़ हो मुझसे?
रति ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया.
रमेश- सॉरी डार्लिंग, मुझे संडे को तो जाना ही पड़ेगा. मगर आज मैंने अपना वादा निभा दिया. देखो तुम्हारे पास बैठा हूँ।

रति उठ कर जाने को हुई तो रमेश ने उसका हाथ पकड़ लिया. रति ने अपना हाथ झटक कर छुड़ा लिया और बोली- जाकर मुंह हाथ धो लो. मैं खाना लगा देती हूं.

थोड़ी देर में उसने खाना खा लिया मगर रति का गुस्सा अभी भी वैसा ही था. वो खाने के बर्तन समेटने लगी तो रमेश ने उसका हाथ पकड़ लिया.
रमेश- रति… रति क्या हुआ? तुम ग़ुस्सा क्यों हो?

रति- जाओ, जाकर अपना बिजनेस देखो. जब देखो तुम्हें बिजनेस की पड़ी रहती है या फिर अपने दोस्तों की। पत्नी घर में अकेली पड़ी रहे उससे तुम्हें क्या!
रमेश- सॉरी जानू … आज तो तुम्हारे पास हूँ. कम से कम आज तो ग़ुस्सा मत हो?

उसकी बात का रति ने कुछ जवाब नहीं दिया.
रमेश- चलो ना डार्लिंग, आज बहुत मूड हो रहा है।
रति फिर भी कुछ नहीं बोली।
रमेश- तुम ऐसे नहीं मानोगी, लगता है तुम्हें मनाने का मेरा पुराना आईडिया ही लगाना पडे़गा।

नाराज बीवी को चोद कर खुश किया – Wife Ki Chudai In Hindi

रमेश ने उठ कर झट से रति को अपनी गोद में उठा लिया.
रति का गुस्सा फुर्र हो गया और बोली- क्या कर रहे हो! उतारो मुझे. बेटी देख रही है. क्या समझेगी वो?
रमेश- समझना क्या है, यही कि आज भी उसके मां और डैड में कितना प्यार है।

इस बात पर रिया हँस दी और रति ने शरमा कर अपना सिर रमेश के सीने में छुपा लिया. रमेश रति को लेकर रूम में चला गया और रिया मन ही मन में सोचने लगी- सचमुच, आज भी मॉम और डैड में कितना प्यार है!

अंदर जाकर रमेश ने अपनी बीवी को बेड पर उतारा.
रति- क्या बात है? आज बड़ा प्यार आ रहा है?
रमेश- जिसकी बीवी इतनी सुन्दर हो, उस पति को अपनी बीवी पर प्यार तो आना ही है।

रति- अच्छा अब क्या रखा है इस उम्र में मुझ में?
रमेश- हाय ज़ालिम, ऐसा ना बोलो. तुममें तो आज भी वह बात है जो किसी और में नहीं।

रमेश ने रति का चेहरा अपने हाथ में लिया और उसके होंठों से अपने होंठों को मिलाते हुए उसे किस करने लगा. दोनों एक दूसरे का साथ देने लगे. रमेश उसके होंठों को चूमता हुआ लेटता गया और रति को भी अपने साथ गिरा लिया.

अब वो रति की गर्दन पर टूट पड़ा और उसको बेतहाशा चूमने लगा. उसने अपनी बीवी की साड़ी के पल्लू को उसके बूब्स पर से हटा दिया और उसके सीने में मुंह देकर चूमने लगा.

फिर रमेश ने रति के ब्लाउज और उसकी ब्रा को भी खोल दिया. रति के बड़े बड़े बूब्स आजाद हो गये. रमेश ने अपनी बीवी की मोटी मोटी चूचियों को हाथ में भर लिया और उनको बारी बारी से चूसने लगा- चप्प … चपपह … हम्म … आह्ह … चत … ऊंम्म … आह्हह … चप … हह करते हुए वो उसकी चूचियों को पीता रहा.

रति भी गर्म होकर रमेश के सिर को अपने बूब्स पर दबा रही थी.
फिर रमेश धीरे-धीरे रति के बूब्स से होता हुआ उसके पेट को चूमते हुए उसकी नाभि को चूमने लगा.

फिर रमेश ने रति को बेड से नीचे खड़ी कर दिया. उसकी साड़ी को खोल कर उसके पेटीकोट समेत सब नीचे करते हुए उसने रति को नंगी कर दिया. फिर उसे बेड पर चढ़ा कर कुतिया बना दिया.

रमेश ने झुक कर अपनी बीवी की चूत से लेकर उसकी गांड तक को नीचे से ऊपर चाटना शुरू कर दिया.
रति- छीः कितनी बार कहा है, गाँड मत चाटिये. वह गन्दी जगह है।

मगर रमेश ने रति की बात पर ध्यान नहीं दिया और उसकी गाँड को मज़े से चाटता रहा.
रति को भी अपनी गाँड चटवाने में मजा आने लगा था और वो गर्म गर्म आवाजें करने लगी थी.

रमेश अब खड़ा हो गया और उसने अपने सारे कपड़े उतार दिये और बिल्कुल नंगा हो गया. उसने अपने तने हुए लंड को रति के मुंह के सामने कर दिया.

रति ने पहले रमेश के लंड को देखा और फिर मुस्कराते हुए बोली- मानना पड़ेगा, इस उम्र में भी आपका जोश देखने लायक है. आज भी कितना तना हुआ है आपका लंड!

रमेश हंसते हुए बोला- डार्लिंग तुम्हारी चूत भी तो कम नहीं है. आज भी वही टेस्ट है इसमें।
अब रति ने रमेश का लंड अपने हाथों में ले लिया और धीरे-धीरे करके उसे अपने मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दिया.

और लंड चूसने की आवाजें बाहर आने लगीं- उम्म … चप … चप … आह्ह … ऊंम्म … अह्ह … मच … मच … करते हुए वो लंड को पूरे से मजे से चूसने लगी.

कुछ देर लंड चुसवाने का मजा लेकर रमेश ने रति को अलग किया और बेड पर लिटा दिया. रति की दोनों टांगें फैला कर वो उनके बीच में बैठ गया और अपना लंड उसकी चूत पर सेट कर दिया.

रमेश ने हल्का धक्का लगाया और आधा लंड उसकी बीवी की चूत के अंदर घुस गया. फिर एक जोरदार धक्के के साथ रमेश ने पूरा लंड अपनी बीवी की चूत में घुसा दिया.

उसके बाद रमेश ने रति की दोनों टांगों को हवा में उठा दिया और चूत को चोदने लगा. रति के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं- आआ आआ … जानू जोर से चोदो मुझे … बहुत दिनों के बाद चुद रही हूं तुम्हारे लंड से मेरे राजा, मेरी चूत का बाजा बजा दो … फाड़ दो मेरी चूत को … आह्ह।

रमेश धक्के पर धक्के लगाये जा रहा था. कुछ देर इसी जोश के साथ चोदने के बाद उसने लंड को रति की चूत से बाहर निकाल लिया. रति झट से उठ कर कुतिया बन गयी और उसके लंड को मुंह में भर कर चूसने लगी.

कुछ देर बाद रमेश ने लंड को उसके मुंह से छुड़ाया और उसकी गांड को घुमाकर अपनी तरफ कर लिया. उसने ढेर सारा थूक अपने लंड पर लगाया और फिर अपने लौड़े को बीवी की गांड पर सेट कर दिया.

रति बोली- नहीं …नहीं … गांड नहीं रमेश।
रमेश- करने दो ना डार्लिंग? कब से तुम्हारी यह गाँड मारने की इच्छा है मेरी लेकिन तुम हो कि अब तक इस छेद को तुमने कुंवारा ही रखा हुआ है. एक बार चोदने दो इसे प्लीज। बहुत ही प्यार से चोदूंगा.

वो बोली- नहीं नहीं, वहां बहुत दर्द होगा.
रमेश- कुछ नहीं होगा, बहुत प्यार से डालकर चोदूंगा.
रति- नहीं मतलब नहीं। मेरी चूत ही चोदो।

निराश होकर रमेश ने अपना लंड रति की चूत में घुसा दिया और चोदते हुए सिसकारियां लेने लगा- ऊंहह … आह्ह … ले साली रंडी … तेरी चूत को फाड़ देता हूं. आह्ह … आज भी कितनी टाइट है तेरी चूत, आह्ह … इसको चोद चोद कर इसकी प्यास बुझा दूंगा.

रति भी ऐसे ही सिसकारते हुए चुदने लगी और दोनों की सिसकारियों से पूरा कमरा गूंज उठा. कुछ देर तक इसी स्पीड से चुदाई करने के बाद रमेश झड़ने लगा- आह्ह … आहाह आआ … मैं गया … आआह … ओहह … यस्स… करते हुए रमेश ने अपनी बीवी की चूत में अपना माल भर दिया.

दोनों शांत होकर बेड पर पड़ गये.
रमेश- होह … उफ्फ … थका दिया तुमने।
रति- अच्छा? सब कुछ शुरू किया तुमने और इल्ज़ाम मुझ पर लगा रहे हो?

रमेश- अरे जिसकी तुम्हारी जैसी बीवी हो, वह भला खुद को रोके भी तो कैसे?
रति- अच्छा, इस उम्र में भी इतनी रोमांटिक बातें।

वो बोला- भाई अभी हमारी उम्र ही कहाँ हुई है, हम तो आज भी जवान हैं, कहो तो एक राउंड और हो जाए?
रति- अच्छा?
दोनों ठहाका लगा कर हंसने लगे.

संडे का दिन आ गया और सब लोग नाश्ता कर रहे थे.
रिया- मां अब मैं चलती हूं. मुझे बहुत देर हो रही है. अभी बहुत सी तैयारी करनी बाकी है आज के इवेंट के लिए। बाय डैड।
रमेश- बाय बेटी। ठीक से अपना काम करना।
रति- बाय बेटा … अपना ध्यान रखना।

रिया के निकलने के बाद रति बोली- आपके दोस्त भी तो आने वाले हैं आज?
रमेश- हाँ, आज रवि आने वाला है।
रति- आप उन्हें कभी अपने घर पर क्यों नहीं बुलाते?

रमेश- अरे वह बहुत ही बिजी पर्सन है. उसे अपने काम से फुर्सत ही नहीं मिलती।
रति- फिर भी कभी कोशिश करके उन्हें घर भी लाइए. हम भी तो मिलें आपके दोस्त से।

बीवी की ख्वाहिश पर रमेश बोला- ठीक है, कोशिश करुँगा. अब मैं भी चलता हूँ. मुझे आज ऑफिस में बहुत काम है अब कल सुबह ही लौटूंगा। बाय।
रति- बाय। अपना ख्याल रखियेगा।

रमेश सीधे ऑफिस पहुँचकर अपने केबिन में चला गया.
रीता उसके केबिन में गयी तो उसके घुसते ही रमेश बोला- पता है आज कौन आने वाला है?
रीता- कौन?
रमेश- गेस्स करो।

रीता- जरूर रवि सर आ रहे होंगे।
रमेश- अरे यार, तुम्हें कैसे पता चल जाता है!
रीता- आज आपकी एक्साईटमेंट देख कर पता चल रहा है।

रमेश- आज तैयार रहना, दो-दो लंड एक साथ लेने के लिये।
रीता- आप फिक्र क्यों करते हैं सर, भगवान ने यह दो छेद दिए किसलिए हैं? आज आप दोनों के पसीने छुड़ा दूंगी.

दोनों जोर से हंसने लगे और तभी रमेश का फोन बज पड़ा.
रमेश- हाँ रवि बोल, कहाँ है तू?
रवि- अरे वहीं, अपने पुराने अड्डे पर, होटल मूनलाइट में।
रमेश- सफर कैसा रहा?

रवि- बिल्कुल ठीक रहा, अब यह सब छोड़ और यह बता तू कब आ रहा है?
रमेश- मैं शाम को 7 बजे तक आ जाऊँगा. हमारी रांड भी तैयार है।
रवि- अरे नहीं, उसे मत लेकर आना।

रमेश- मगर क्यों?
रवि- तू भी क्या यार … एक ही रंडी के पीछे पड़ा है।
रमेश- मतलब?

रवि- अरे मैंने यहाँ एक कॉलेज गर्ल सेट कर रखी है. आज रात उसके साथ ही मज़े करेंगे।
रमेश- साले, तू हरामी का हरामी ही रहेगा. जहाँ जाता है वहां सेटिंग कर लेता है। ठीक है रीता को नहीं लाऊंगा आज रात।
रवि- मगर तू कोशिश करके जल्दी आना. तुझसे कुछ काम की बातें भी करनी हैं. फिर 8 बजे हमारी रांड भी आ जाएगी।

रमेश- ठीक है, मैं जल्दी आने की कोशिश करूंगा. बाय।
रवि- बाय।
रमेश ने फोन रख दिया.

उन दोनों की बातें सुन कर रीता गुस्सा हो गयी.
रमेश- सॉरी जानेमन. उसने पहले ही कहीं सेटिंग कर ली है. तुम्हारी बारी अगली बार आएगी और फिर रगड़ कर तुम्हें चोदेंगे.

रीता- कोई जरूरत नहीं है. जहां चाहो वहां मुंह मारो, मुझसे पूछने की क्या जरूरत है?
रीता पैर पटकते हुए गुस्से में केबिन से बाहर निकल गयी.

शाम 6.30 बजे रमेश अपने केबिन से निकला और रीता से बोला- मैं जा रहा हूं. तुम सारा काम देख लेना.
रीता- हां, देख लूंगी.
फिर रमेश ऑफिस से होटल मूनलाइट के लिए निकल गया.

कहानी अगले भाग में जारी रहेगी.

समधी जी से चुत मरवाकर अपने आप को ठंडा किया।

एक Desi Indian Chut Chudai Kahani में पढ़ें। मेरे पति मुझे बहुत कम चोदते थे इसलिए मेरी इच्छा पूरी नहीं हुई। तो मैं अपनी बेटी के ससुर से चुदवाई।

मेरा नाम मेघना है और मैं दिल्ली की रहने वाली 42 साल की प्यारी महिला हूँ। मैं बहुत सुंदर हूँ। मेरा शरीर मांसल गदराया हुआ है और मेरे दूध बड़े आकार के हैं।

मैंने पिछले साल मेरी बेटी की शादी की। मैं और मेरा पति अब मेरे घर में थे। वो मुझे चोदते थे लेकिन मेरी इच्छा नहीं पूरी होती थी।

इसलिए मैं बहुत गर्म हो गई थी।

जीवन इसी तरह खत्म हो रहा था।

एक दिन मेरी बेटी ने फोन किया और बताया कि मेरे समधी, उसके ससुर, मेरे घर आ रहे हैं।

मैंने अपने पति को यह बताया। तो वे उनके स्वागत के लिए कुछ नाश्ता लेने के लिए बाजार गए।

मैं भी तुरंत तैयार हो गई। मैं पीली साड़ी और लाल ब्लाउज पहनकर तैयार हो गई।

समधी जी करीब दो घंटे बाद घर आए। उनका नाम राजकमल था और उम्र ४५ वर्ष थी। मैंने उन्हें भोजन दिया और कुछ नास्ता कराया। वह मेरे पति से बातचीत कर रहे थे।

कुछ देर बाद पति के कार्यालय से फोन आया।

मेघना समधी जी की देखभाल करो मुझे जरूरी काम से जाना है। मैं शाम तक आ सकता हूँ। मेरे पति मुझसे ये बात कहकर अपने कार्यालय निकल गए।

मैंने उत्तर दिया: ठीक है।

मैं समधी जी को खाना खिलाने लगी।

खाना परोसते समय मेरा पल्लू हट गया और समधीजी ने मेरी चुचियों पर नज़र डाली। मेरे रसीले मम्मों को उसने देखा।

मैंने अपना पल्लू तुरंत ठीक किया।

भी उन्होंने अपनी दृष्टि हटा दी।

किंतु अब उनकी दृष्टि मेरे मम्मों के उभारों पर स्थिर हो गई।

मैं भी इसे नोटिस कर रही थी। दशकों से दबी हुई मेरी आग फिर से भड़कने लगी। न चाहते हुए भी मेरे मन में चुदाई के विचार आने लगे।

खाना खत्म होने पर मैं और समधी जी बातें करने लगी। मेरे ब्लाउज पर उनका पूरा ध्यान था।

मैंने पूछा, “समधी जी, मेरी समधन कैसी है?”

उसने अपनी नजरें मेरे चूचों से हटाकर कहा, “हां, जी, वह ठीक है।”

मैंने इठलाकर कहा कि उनको भी ले आए होते!

हाँ श्रीमान, मैं अकेले में आपसे बात नहीं कर सकता था अगर वे आते।

मैं मुस्कुराने लगी।

फिर उसने कहा, “आप पर ये पीली साड़ी बहुत सुंदर लग रही है।”

मैं थोड़ा शर्मा गई।

फिर मेरे पति ऑफिस से वापस आ गए, बातें इसी तरह चलती रही।

रात को दोनों ने शराब पी। मेरे पति ने बहुत अधिक पेय पी लिया और नशे में धुत्त हो गये।

दारू पीने के बाद भी समधीजी की कामुक निगाहें मेरे मम्मों पर थीं।

मेरे पति से नजरें बचा कर मैंने एक बार फिर से समधी जी को अपने मम्मों की झलक दिखाई।

वह तुरंत गर्म हो गए और मौका मिलते ही मेरी गांड पर हाथ फेर दिया।

उनकी इस कार्रवाई ने मुझे गर्म कर दिया। मैंने सिर्फ उन्हें देखकर मुस्कुराया, कुछ नहीं कहा।

फिर हम सब सो गए।

समधी जी को एक कमरे में लेटने के लिए मैंने कहा।

तब मेरे पति ने मेरी सलवार में हाथ डालकर मेरी चूत सहलाना शुरू कर दिया।

वह मेरी चुचियों को चूसने लगे, मैं सफेद कुर्ता पहनी थी। मजाक में मैं भी उनके लिंग को सहलाने लगी।

“रानी, लंड चूस दो।”

मैं अपने पति का लंड मुँह में लेकर चूसने लगी। लेकिन मेरे पति बहुत नशे में था, इसलिए वह बहुत देर नहीं टिक सका और उनका सामान मेरे मुंह में ही निकल गया।

मैंने मुँह में भरा माल थूका और अपना कुर्ता ठीक कर लिया। उनके हाथ से सहलाने से मेरी चुत मेरी सलवार में लग गई।

मुझे गर्म करके मेरे पति सो गए। मैं नहाने के लिए अपने कमरे से बाहर निकली। मैंने बाथरूम का दरवाजा खोलते ही हैरान हो गई। परमेश्वर अपने बड़े तलवार को हाथ में लेकर सहला रहे थे।

मुझे देखकर वे नेकर में अपना लंड डालकर मुझसे माफी मांगे।

मैंने उनके लंबे लंड की ओर देखा और कहा कि कोई बात नहीं।

मैं उनकी ओर देखता रही। फिर मेरी चूत की ओर भी देखने लगे। जहां मेरी चुत का माल मेरी सलवार पर था।

उसने मुस्कराते हुए कहा कि शायद समधी ने आपकी प्यास बुझा दी है।

हां, उन्होंने बुझा लिया, लेकिन मेरे अंदर आग लगा दी है, मैंने उनके फन उठाते हुए कहा।

उसने पूछा, “तो क्या इरादा है समधन जी?”

मैंने समधी जी के नेकर के ऊपर से लंड को पकड़कर कहा कि मेरा इरादा बिल्कुल स्पष्ट है; अब आप ही मेरी आग बुझा दो।

वह मुस्कुराते हुए मेरे कुर्ते के ऊपर से मेरे बूब्स मसलने लगे।

हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे। मैं सिर्फ सलवार में उनके सामने खड़ी थी तब उन्होंने मेरा कुर्ता उतार दिया। मैंने ब्रा नहीं पहनी थी, इसलिए मेरे दोनों स्तन नंगे थे, जो उनकी आंखों में वासना का संकेत दे रहे थे।

मुझे खींचकर एक बूब पीने लगे।

जब मैं समधी जी के होंठों पर हाथ डालने लगी, तो मैं सित्कार करने लगी, आह… आहहब्ब। पी लो समधीजी..। मेरा दूध चूस लो। क्या सुंदर दिखता है!

साथ ही, समधी जी अपने दांतों से मेरे चूचुकों को चूस रहे थे। जब मैं खुशी से बाहर निकल गया, तो वह और भी उत्तेजित हो गया और मेरे चूचे भींचने लगा।

फिर मैंने उनसे कहा कि पूरा मनोरंजन करने के लिए अपने कमरे में चलो।

मैं सिर्फ सलवार में उनके कमरे में आ गई और समधी जी ने मुझे अपनी बलिष्ठ भुजाओं से अपनी गोद में उठा लिया।

मेरे मम्मों को चूसा और मुझे अपनी गोद में लिए ही बहुत प्यार किया। फिर उन्होंने मुझे बिस्तर पर डालकर मेरे पूरे शरीर पर किस करने लगे।

परमेश्वर ने कहा, “तुम बहुत सुंदर हो।” काश मैं तुम्हारा पति होता तो तुम्हें चोदता।

मैंने कहा कि आज से मैं तुम्हारी पत्नी हूँ..। इसे अपना समझिए।

मेरी सलवार उतारकर मुझे चूमा।

मैंने अपनी चुत छिपाते हुए कहा कि आप भी अपने कपड़े उतार दें।

एक मिनट से भी कम समय में श्रीमान ने अपने सारे कपड़े उतार दिए। उनका मोटा, लम्बा लंड एकदम तनतना रहा था।

आह, तुम्हारा लंड कितना मोटा है, मैं उठकर उसे हाथ में लिया।

कुछ नहीं कहते हुए उन्होंने मुँह मेरी चूत पर रखा और मेरी दोनों टांगों को फैला दिया। परमेश्वर ने मेरी भारतीय चुत चाटने लगे। मेरी चूत के छेद में अपनी जीभ डालने लगे।

मैं- आह… हां..। उह, समधी जी, चाटो मेरी चूत। मुझे अपनी रानी बनाओ…। आह।

मुझे मस्त करने के लिए परमेश्वर ने लगातार मेरी चुत चाट दी। मैं अपनी चुत में हूक सी उठ रहा था जब परमेश्वर ने अपना लंड डालकर मुझे ठंडा कर दिया।

मैंने कहा, “आह, अब मेरी देसी भारतीय चुत में भी लंड डाल दीजिए।”

उसने अपना सुपारा मेरी चुत पर रखकर एक जोरदार शॉट मारा। मैं उनके मोटे लंड से अकबका गई।

परमेश्वर का लंड बहुत मोटा और लम्बा था। मीठे दर्द से मैं चिल्लाने लगी: आह..। परमेश्वर मार डाला..। धीरे-धीरे कीजिए।

परमेश्वर मुझे चोदने लगे।

कुछ देर बाद, मैं भी उनके लंड से चुत चुदी करने के लिए उत्सुक हो गई। मैं उनके मूसल लंड से चुदने लगी। मेरी चुत उनके बड़े लंड से भर गई।

मैं वासना से चीख रही थी, आह, समधी जी..। राजा जी, आपने अपनी पत्नी को अपनी बीवी समझा…। आह और एक तीव्र आह और धक्का।

मेरी जान कितनी सुंदर चुत है, कहते हुए समधी जी मेरी चुत गपागप करते हुए आहें भर रहे थे।

मैं भी उनको अपने ऊपर खींचकर उनके दूध चुखवाते हुए चुदाई करवा रही था।

अब परमेश्वर ने मेरी बहुत जल्दी चुदाई करने लगे। पच पच की आवाज निकलने लगी।

थोड़ी देर बाद समधीजी ने पूछा, “आह जान, बताओ लंड का पानी कहां डालूँ?”

आह, मेरी जान, अपना बीज मेरी चुत में डाल दो। सूखी चुत से तराई निकलेगी।

जैसे ही उन्होंने यह सुना, उन्होंने दस बारह धक्के मारकर मेरी चुत भर दी। मैं भी उनके रस से पानी पिया। हम दोनों ठन्डे हो गए।

करीब पंद्रह मिनट बाद मैंने कपड़े पहनकर अपने कमरे में प्रवेश किया।

उधर मेरे पति सो रहे थे, अपनी गांड औंधी किए हुए..। उन्हें दीन दुनिया का कोई स्मरण ही नहीं था।

उन्हें तिरस्कृत करते हुए मैं भी बाजू में सो गई।

सुबह उठने पर मुझे चुत में दर्द हुआ। मैं उठकर खाना बनाया। समधी जी और पति को भोजन दिया गया। पति अपनी पर ऑफिस चले गए। मैं खाना बनाने लगी।

तभी परमेश्वर ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और मेरे ब्लाउज के ऊपर से मेरे दूध को दबाने लगे।

“कल रात तुमने मुझे खुश कर दिया,” परमेश्वर ने कहा। आज भी मुझे खुश करो।

मैं हंस पड़ी।

इसलिए उन्होंने मेरे ब्लाउज के हुक को खोला। मैं नग्न हो गयी और वे मेरी चुचियों को दबाने लगे।

मैंने कहा, समधी जी, छोड़ दो।

वह मुझे चुंबन दे रहे थे। मुझे किचन में ही नंगी करके मेरी साड़ी और पेटीकोट उतार दिया।

परमेश्वर मेरी गांड चूमने लगे। गर्म होकर मैं उनका लंड पकड़ने लगी।

मुझे किचन की स्लैब पर बिठाकर उन्होंने मेरी टांगों के बीच में हाथ डाला। मुझसे खेलने लगे।

मैं डर गया जब मेरे घर की डोर बेल बजी। मैं तुरंत कपड़े देखने लगी। किचन के फर्श पर पानी था, जिससे मेरी साड़ी खराब हो गई, लेकिन पेटीकोट गीला नहीं था।

मैंने उसे पहना और समधी जी ने शर्ट पहनी।

समधी जी फिर कमरे में चले गए। जब मैं दरवाजे खोलकर दरवाजे की झिरी से देखा, तो मैंने देखा कि पति महोदय आ चुके थे।

जब मैंने दरवाजा खोला, वे मुझे देखकर पूछा, “यह क्या पहन रखा है?”

मैंने कहा कि वह जल्दी में बाथरूम में पहन गई थी।

मैंने जल्दीबाजी में समधी जी की शर्ट पहनी हुई थी।

मेरे पति अपनी कार्यालय की एक फ़ाइल भूल गये गई थे। वे फ़ाइल लेकर चले गए। मैंने दरवाजा बंद करके फिर से समधी जी के कमरे में प्रवेश किया।मैं उनसे चिपक गयी और अपनी बांहें फैला दीं।

“आज मैं तुम्हारी गांड मारूंगा,” वे फिर से कहते हुए मुझे नंगा कर दिया।

मैंने कहा कि मैंने पहले कभी मरवाई नहीं है। फट तो नहीं जाएगी।

लेकिन उनके जोर से मैं उनसे गांड मरवाने के लिए मान गयी।

पहले उन्होंने तेल लगाया और फिर मुझे नीचे झुकाकर मेरी गांड में अपना लंड डाला। वह मेरी टांगों को फैलाकर कहा, “गांड ढीली रखना”।

जैसे ही मैं अपनी गांड को ढीला किया, उन्होंने एक तेज धक्का मारा। मेरी गांड उनके मोटे लंड से चीर गई।

मैं शोर मचाने लगी: आह..। समधी जी बहुत दर्द हो रहा है।

पर वह मेरी चीख पुकार को नजरअंदाज करते हुए मेरी गांड को धीरे-धीरे चोदते रहे।

मैं दर्द से “आह…” करती रही। मैं भी लंड का आनंद लेने लगी। दर्द कुछ देर बाद खत्म हो गया।

थोड़ी देर बाद उन्होंने मेरी गांड में अपना माल डाल दिया। उनके गर्म माल से मेरी गांड गर्म हो गई।

हम दोनों अलग हो गये। उन्होंने मेरी गांड पर घी लगाकर मुझे बहुत देर तक सहलाया। मैं इससे ठीक हो गयी।

कुछ देर बाद, उन्होंने मेरी चुत में भी लंड डाला और हम दोनों चुदाई करने लगे।

एक घंटे बाद परमेश्वर अपने घर चले गए। अब मुझे उनका बड़ा लंड मिलम गया था, तो मुझे आगे भी चुदाई करनी पड़ी।

यह Desi Indian Chut Chudai Kahani आपको कैसी लगी? मुझे मेल और कमेंट करके बताएं।

पड़ोस वाली भाभी की करी चुदाई | Padosan Bhabhi Ki Antarvasna Chudai Ki Kahani

Padosan Bhabhi Ki Antarvasna Chudai Ki Kahani में अपना लंड डालने के बाद, देसी भाभी जी की सेक्स कहानी में मैंने पूरा मजा लिया। लेकिन भाभी को इसके लिए क्या बताया?

प्रिय, मैं आज सुबह आपको निशा भाभी के साथ मेरी चुदाई की कहानी सुनाता था।
पूर्वकथा

आपने पड़ोसन भाभी की चूत चोदी में पढ़ा कि भाभी मेरे से गांड मरवाने के लिए तैयार नहीं थीं।
मैंने उन्हें गांड मरवाने के लिए सैट किया और उनकी गांड को गड्डा बनाया।

इस देसी Padosan Bhabhi Ki Antarvasna Chudai Ki Kahani में आपको यह सब पढ़ने को मिलेगा।

निशा: फ़ुद्दी को पहली बार मारने का दर्द कैसा था! और कल फ़ुद्दी में लंड डालने से भी बहुत दर्द हुआ। तुमने पहले से चुद चुकी फ़ुद्दी को पीटा था, तो अब गांड मरवाने में कितना दर्द होगा? तुम्हारा लंड मेरे पति से अधिक मोटा और बड़ा है।
मैं कहता हूँ कि गांड मरवाने में दर्द होगा, लेकिन फ़ुद्दी मरवाने से भी अधिक मज़ा आएगा।

Antarvasna Bhabhi Ki Chudai Hindi Stories

निशा भाभी भी गांड मरवाने का दिल था, लेकिन मेरा लंड देखकर वे घबरा गईं।

थोड़ी देर बाद निशा भाभी ने कहा, “चल, एक शर्त लगाते हैं!”
मैं—किस तरह की शर्त?
निशा: आज आप मेरी गांड मार देंगे तो क्या कहेंगे? मैं वे करेंगे..। और अगर मार नहीं पाया, तो मैं क्या कहूँगा..। आप इसे करेंगे। यह भी एक शर्त है कि तुम मेरी प्यार से मारोगे, बलपूर्वक नहीं! गाण्ड मरवाने में मेरी मर्ज़ी होनी चाहिए, और हां, तुम मेरी फ़ुद्दी भी मारोगे उस दौरान।
मैं: ओके, अनुमोदन..। अब बोलें।

निशा: अगर तुम मेरी गांड नहीं मार पाओगे, तो तुम मुझसे शादी करोगे, वह भी मुझे भगा देगा और मैं सारी उम्र तुम्हारी चूत की दासता करोगे।
मैं- मैं पहले से ही तुम्हारा हूँ, तो ये क्या शर्त है? पर देखो, तुम पहले लंड चूसने से भी मना कर रहे थे, लेकिन अब तुम लंड से हट नहीं रहे हैं।

निशा: देखो, रहने दो!
मैं मानता हूँ, लेकिन अगर मैं गांड मार सकता हूँ तो क्या मिलेगा?

निशा: तुम बताओ..। क्या करना चाहिए?
मैं: मेरे पास दो शर्त हैं। मैं तुम्हें पहले बाथरूम के बाहर लंड पर बिठाकर गोद में उठा कर उधर ले जाऊँगा। वह भी पूरी तरह से नंगी है..। हम स्मूच करते हुए बेडरूम से बाथरूम की ओर जाएंगे। अब आप इस शर्त को कैसे पूरा करेंगे? ये दोपहर में होगा और सफल माना जाएगा जब कोई आसपास रहनेवाला हम दोनों को देखेगा!

निशा: अनुमोदन..। दूसरी शर्त भी?

मैं भी तुम्हारी जेठानी और ननद को चोदना चाहता हूँ, तुम मुझे मदद करेंगे। फिर मैं, तुम और तुम्हारी जेठानी थ्रीसम करेंगे।
यह सुनकर निशा भाभी थोड़ा चौंकी पर मुस्कुराती हुई मान गईं।

भाभी ने खुद भी शर्त लगाई।
निशा, अगर आज तुम मेरी गांड नहीं मार सकते, तो मैं कभी किसी लड़की की तरफ नहीं देखूँगा।
मैं—डन।

मैं कहां विश्वास करने वाला था।
सारा दिन इसी तरह बिताया गया।
हम सिर्फ नंगे एक दूसरे को देखते रहे।

सारा दिन सिर्फ एक दूसरे को टकराते रहे, मुस्कुराते रहे और शरीर की आग को बढ़ाते रहे, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
मुझे आज भाभी की गांड मारनी थी, इसलिए मैं निशा भाभी को इतना तड़पाना चाहता था कि वे खुद को गांड मारने को मान जाएं।

मैं बस उन्हें गर्म करता रहा और उनकी चूत को जलाता रहा।

अब शाम हो गई और निशा भाभी को गांड मारने का समय आ गया।
मैंने निशा भाभी को अपनी बांहों में लेकर सहलाना शुरू कर दिया और मुस्कुराने लगा।

निशा भाभी मुझसे दूर भागने लगीं।
लेकिन मैं उन्हें कहां जाने देता..। आज बस गांड मारना था।
मैं भाभी को एक बार गर्म करना जानता था..। फिर ये भी गांड मारेंगे।

मैंने भाभी को मुस्कुराते हुए बेडरूम में ले गया।

मैंने उन्हें बेड पर रखा और खुद उनके ऊपर चढ़कर उनके स्तनों को मसलने लगा।
मैं पूरी तरह से निशा भाभी के साथ था।
मैंने सोचा कि भाभी अब गर्म हो गई हैं।

Padosan Bhabhi Ki Kamukta Sex Stories

मैंने अपनी भाभी से कहा कि वह मेरा लंड चूस ले, लेकिन वह खुद ऊपर आकर मेरा लंड मुँह में भर लिया।

वे खुशी-खुशी लंड चूसने लगीं। तब हम दोनों 69वें स्थान पर आ गए।
वे मेरा लंड चूसने लगीं, जब मैं उनकी चुदाई करने लगा।

शीघ्र ही निशा और भाभी गर्म हो गईं। जब वे उठी और लंड पर बैठने लगीं, तो मैं पीछे चला गया।

निशा: आज फ़ुद्दी नहीं मारनी चाहिए क्या?
मैं मारना चाहता हूँ, लेकिन दूसरी जगह!

वे राजी हुए।
मैंने भाभी को घोड़ी बनाया और लंड उसकी पीठ पर लगाया।
मैंने पहले टोपा अंदर डाला और फिर बाहर निकाला।

निशा और भाभी को इससे गुस्सा आया और कहा, “जान तड़फाओ मत, मेरी फ़ुद्दी चोद दो!”
मैं—और कबसे तुम मुझे परेशान कर रहे हो..। उसके पास क्या है?

निशा: मैं तुम्हें जितनी मार दे रही हूँ!
मैं-फ़ुद्दी, मैं जब चाहूँ मार डालूँ। लेकिन तुम मुझे चाहिए कुछ भी नहीं देती!
निशा: यह आदमी गांड नहीं है..। अगर आपको न्याय चाहिए तो ले लो..। चाहे जितनी बार मार लो गाण्ड मरवाना दर्दनाक है।
मैं-तुम अभी भी इस तरह बोल रहे हो। बाद में उछल-उछल कर गांड मरवाओगी..। लेख लिखें।

यह सब होते हुए, मेरा भाभी की फ़ुद्दी में लंड डालने और निकालने का खेल जारी था। जो निशा भाभी को पागल बना रहा था।
निशा ने कहा: “ओके, गांड मार लो, लेकिन पहले फ़ुद्दी मार लो।”
मैंने उनकी फ़ुद्दी में थोड़ा सा लंड डालकर निकाल दिया।

अब निशा भाभी से रहा नहीं गया और वे सीधे हो गए, कहते हुए, “अब मेरी फ़ुद्दी तो मारो।” बाद में कहा है कि गांड भी मारना चाहिए!
मैं क्रोधित हो गया..। लेकिन अगर बाद में आप मुकर गए?

निशा भाभी ने कहा, “लो, मार ले पहले गांड ही।” मैं तुम्हें प्यार नहीं करता। तुम्हारी बातें ही लागू होंगी। अगर आपको भरोसा नहीं है, तो पहले अपनी गांड मार दें।
इसके बाद भाभी ने अपनी गांड मेरी ओर कर दी।

मैंने सोचा कि प्यार से गांड मारने में मज़ा आता है..। क्योंकि ये गुस्से में देंगे, इसलिए मज़ा नहीं आएगा।

तब मैंने निशा भाभी के मम्मे पकड़े और उन्हें सीधा कर दिया।

यार, तुम्हारी मर्ज़ी के बिना कुछ नहीं होगा, मैंने कहा और होंठों पर जोर से काट लिया। लंड और फ़ुद्दी मिलने के बाद गांड लंड मिलेगा।
भाभी खुश थीं।

अब मैंने उन्हें सीधा लिटाकर फ़ुद्दी में लंड डाला। फ़ुद्दी इतनी चिकनी थी कि एक बार में मेरा लंड सीधा अन्दर चला गया।

तुरंत बेडरूम में फक-फक-फक की आवाज़ आने लगी, और हम दोनों की चुदाई भी चलने लगी।

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थोड़ी देर बाद भाभी झड़ने वाली थीं, तो मैंने अपना लंड निकाल लिया और निशा को भाभी की गांड मारने का एकदम सही अवसर मिल गया।
निशा भाभी झड़ गई जब मैंने उनकी फ़ुद्दी में उंगली डाली।

लेकिन मैं कहां रुकने वाला था..। तुरंत मैंने निशा भाभी को घोड़ी बनाया और उनकी गांड में अपना मुँह डाल दिया।
मैं अपनी जीभ से भाभी की गांड के छेद को चाटने लगा।

निशा भाभी अब बचने की कोशिश नहीं कर रही थीं क्योंकि वे पूरी तरह से मस्त थीं।
वे मेरा पूरा सहयोग कर रहे थे।

मैंने आयिल को उठाया और निशा भाभी को नीचे फर्श पर लिटा दिया।
निशा ने उंगली की मदद से भाभी की गांड में तेल लगाया, साथ ही अपने लंड पर भी, ताकि लंड आसानी से अंदर जा सके।

अब मैंने निशा भाभी की टांगें उठाकर ऊपर की तरफ कर दीं और अपना लंड उनकी गांड पर रखा, जिससे उनकी गांड मेरे सामने आ गई।

मैं लंड को अंदर डालने लगा, लेकिन वह फिसल गया।
मैंने निशा भाभी से कहा, “भाभी, जब मैं आपसे कहूँ तो आप कुछ खाँसी करेंगे।”

  • क्यों, भाभी?

मैं: यह गांड के छेद को थोड़ा खुला देता है..। जिससे लंड अंदर जाना आसान होगा।
निशा भाभी ने भी इसी तरह किया।

भाभी ने खाँसी दी जब मैंने उसके गांड पर लंड रखा।
मैंने तुरंत धक्का मार दिया। लंड का सुपारा निशा भाभी की गांड में फंस गया।

भाभी तड़पने लगीं, पीछे होकर गाली बकने लगीं और लंड निकालने की कोशिश करने लगीं।
मुझे भी बहुत गुस्सा आया कि सुपारा अंदर जाते ही थोड़ा सा छिल गया..। पर मैं इस अवसर को कैसे भुला सकता था?

निशा भाभी ने आंखें और मुँह बंद कर लिए। दर्द के कारण उनकी आंखें भी रोने लगीं।

मैं उन्हें चुंबन करने लगा और उन्हें थोड़ा नॉर्मल करने लगा ताकि मेरा लंड अंदर जाए।
जैसे ही भाभी थोड़ा शांत हुईं, मैंने एक तीव्र झटका दिया। भाभी की गांड को चीरता हुआ मेरा लंड आधा अंदर चला गया।

निशा भाभी की चीख मेरे मुँह में दबकर रह गई।
भाभी की आंखों में लगातार आंसू बह रहे थे। मुझे धक्के मारते हुए वे कहा, “साले लंड निकाल, मैं मर जाऊँगा।” मुझे फिर कभी मार डालो..। आज रहने दो..। बहुत दर्द है।

मैं जानता था कि अगर लंड निकाल दिया जाए तो बाद में कुछ भी नहीं होगा।
भाभी गांड मारने नहीं देंगे।

मैं ऐसे ही उनके ऊपर चढ़ा रहा और स्मूच करके उनके मम्मों से खेलने लगा ताकि वे थोड़ा शांत हो जाएं।

जैसे ही वे थोड़ा शांत हो गए, मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए, और अब निशा भाभी भी साथ दे रही थीं।
मेरा लंड अभी आधा भर गया था। वास्तविक कार्य अभी बाकी था।

जैसे ही निशा भाभी उठा उठा कर गांड मरवाने लगीं और थोड़ा नॉर्मल हुईं, मैंने एक जोरदार झटका मारा, जिससे लंड पूरा अंदर चला गया।
हम दोनों की चीख से निशा भाभी पूरी तरह बेहोश हो गईं।

मैंने उन्हें पकड़ा और उठाया..। मुझे गालियां देने लगी भाभी जब वे सचेत हुईं।
वे रो रही थीं और मिन्नतें करने लगी, उनकी आंखों में सिर्फ आंसू थे।
यह सब देखकर मुझे एक सेकंड के लिए लग गया कि मैं अपने लंड को बाहर निकाल दूँ।

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“मेरी गांड फाड़नी है क्या?” निशा ने पूछा। आराम करो!
मैंने हंसते हुए कहा: “फाड़ना क्या है?” गांड फाड़ दी है..। अब बस मनोरंजन है।

निशा: बाहर निकाल दो लंड..। बहुत दर्द है। जारी है..। लंड बाहर निकाल दो।
मैं नहीं माना और उनके ऊपर ऐसे ही चढ़ा रहा।

अब निशा भाभी ने क्रोधित होकर मेरी कमर में अपने नाखून चुभो दिए, जिससे मैं रो पड़ा।
नाखून चुभो दिए गए थे और एक लंड छिल गया था।

अब भाभी को कौन बताए कि भाभी की गांड इतनी टाइट है कि लंड भी छिल जाता है?
पर बहुत मज़ा आता है।

निशा गुस्से से मुझे थप्पड़ मार रही थी और अपनी टांगें हवा में फैला रही थीं।
मैं जानता था कि भाभी की गांड फट चुकी है और उसे दर्द सहन नहीं हो रहा है, इसलिए मैंने उन्हें कुछ नहीं कहा।

मैंने धक्के मारने शुरू किया जब निशा भाभी कुछ नॉर्मल हो गईं।
लेकिन निशा भाभी अभी भी रो रहे थे।

मैंने उनके रोने पर ध्यान नहीं दिया और धीरे-धीरे धक्के देने लगा और उन्हें स्मूच करने लगा।
मैं जानता था कि इनका रोना थोड़ी देर बाद खत्म हो जाएगा और भाभी खुश होकर गांड मरवाएगी।

निशा भाभी को लगता था कि उनकी गांड फट गई है, इसलिए वह लंड को धीरे-धीरे बाहर नहीं निकालती।
कुछ देर बाद निशा भाभी भी कुछ देर साथ देने लगी, लेकिन दर्द के कारण वे बहुत ज़ोर नहीं दे रही थीं।

अब हम दोनों गांड मारने का आनंद लेने लगे। तेल के कारण अब लंड आराम से अंदर बाहर जा रहा था।

अब निशा भाभी ने भी नीचे से गांड उठा दी।
मैंने देखा कि देसी भाभी जी अब सेक्स करने लगी हैं।

मैंने एक बार पूरा लंड निकाला और सुपारा ही अंदर रहने दिया।
फिर एक जोरदार झटका दिया, जिससे मेरी जांघें निशा भाभी की गांड पर लगीं।
इसमें मज़ा आया।

अब मुझे भी निशा भाभी की गांड मारने में मज़ा आ रहा था।
निशा: मैं गांड मरवाने में इतना मज़ा आता था कि मैं पहले ही मरवा देती। आप मेरी गांड मार ही गए।

मैं आपको शर्त याद है?
निशा: हां, मुझे याद है, सब होगा।

मैंने सोचा कि मैंने निशा भाभी की गांड की सील तोड़ी है, भले ही मैंने इसे नहीं तोड़ा होता। आज सीलपैक गांड मारने में मज़ा आया।
मैंने सोफे पर बैठकर अपना लंड निकाला।

मैंने भाभी को लंड पर आकर बैठने को कहा।
चंद सेकंडों में, निशा भाभी लंड पर बैठ गईं और ज़ोर से नाचने लगीं।
मैं भाभी के हिलते हुए मम्मे देख रहा था।

मैं भाभी को कुछ देर ऐसे ही चोदने के बाद डॉगी स्टाइल में गांड मारने लगा।
इस आसन में निशा भाभी की गांड चुदाई हुई।

मैं पीछे से उनके बाल पकड़कर उनकी गांड को ज़ोर से पीटने लगा, जिससे निशा भाभी की गांड लाल हो गई।

मैं झड़ने वाला था, इसलिए भाभी से पूछा कि मैं अपना रस कहां निकालूँ?
वे सिर्फ गांड में निकालने को कहा।

मैं भाभी की गांड में गिरकर उनके ऊपर गिर गया।
निशा भाभी सिर्फ मेरे नीचे दब गईं।

थोड़ी देर बाद, निशा ने चूसकर लंड को गांड से बाहर निकाला।
हम नंगे ही एक दूसरे से लिपटकर सो गए।

निशा की मदद से मैंने बाद में निशा की जेठानी और ननद की चुदाई भी की।

वह बाद में सब लिखेगा। आप मेरी देसी Padosan Bhabhi Ki Antarvasna Chudai Ki Kahani पर अपने विचार लिखने के लिए कृपया धन्यवाद।

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